ART---विरासत में मिली कला से पहुंची शिखर तक

 

- चन्द्रा पारंपरिक कशीदाकारी व डिजाइनिंग में महारत

By: Amit Dave

Updated: 02 Aug 2020, 06:32 PM IST

जोधपुर।

विरासत में मिली पारंपरिक कशीदाकारी और जूती निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर जोधपुर की चन्द्रा गुजर शिखर तक का सफर तय किया है। करीब 10 साल की उम्र में चन्द्रा के पिता का निधन हो गया। पारंपरिक जूती निर्माण करने वाले परिवार में अकेली मां का तीन भाई-बहनों के परिवार का गुजर-बसर करना पहाड़ जैसी समस्या से कम नहीं था। विकट परिस्थिति में उनकी मां ने तीनों बच्चों को पारंपरिक जूती बनाना और कशीदाकारी का काम सिखाया। इन्ही बच्चों में चंद्रा ने अपने हुनर के दम पर ऊंचाइयां छुई। चन्द्रा अपनी कला के लिए राष्ट्रपति से सम्मानित भी हो चुकी है।

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केवल साक्षर, ट्रेनिंग दे रही देश-विदेश के विद्यार्थियों को

60 वर्षीय चंद्रा केवल साक्षर है और दूसरी कक्षा तक पढ़ाई है। चंद्रा ने निफ्ट जोधपुर सहित रायबरेली व गांधीनगर, एफडीडीआई जोधपुर व आगरा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजायनिंग, पर्ल एकेडमी जयपुर सहित कई राज्यों के डिजायनिंग कोर्स के विद्यार्थियों को कशीदाकारी व जूती निर्माण की बारीकियां सिखाई है। इसके अलावा बांग्लादेश, इंग्लेण्ड व कई देशों के विद्यार्थियों, भारत सरकार की हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय की गुरु-शिष्य योजनान्तर्गत भी कई विद्यार्थियों को कशीदाकारी व जूती निर्माण प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी है। 50 वर्षो से काम कर रही चंद्रा ने कशीदाकारी और जूती निर्माण की बारीकियां अपने बेटे-बेटी को भी सिखाई। अभी कोरोना काल में नया ऑर्डर नहीं होने के बावजूद भी सिखाने का काम जारी रख रही है और अब अपने पोते-पोतियों को कला सिखा रही है।

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हस्तियां रही है मुरीद

चंद्रा की कारीगरी की कई हस्तियां मुरीद है। जिनमें जोधपुर का राजपरिवार, ब्रिटेन के प्रिंस चाल्र्स, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम व कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल है। चंद्रा ने दिल्ली सहित देशभर में आयोजित हस्तशिल्प मेलों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है और पुरस्कारों से सम्मानित हुई है।

Amit Dave Reporting
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