scriptRescue vehicles that save thousands of wildlife in monsoon fail again | मानसून में हजारों वन्यजीवों को बचाने वाले रेस्क्यू वाहन फिर से नाकारा | Patrika News

मानसून में हजारों वन्यजीवों को बचाने वाले रेस्क्यू वाहन फिर से नाकारा

नए वाहनों की लंबे अर्से से मांग की अनदेखी वर्षाकाल में वन्यजीवों के लिए हो सकती है जानलेवा साबित

जोधपुर

Published: July 18, 2021 10:23:00 am

जोधपुर. वनविभाग के 16 साल पुराने नाकारा साबित हो चुके रेस्क्यू वाहन इस बार मानसून में जोधपुर जिले के हजारों वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकते है। मानसून में हर साल श्वान हमलों से घायल होने वाले हजारों वन्यजीवों को वनविभाग वन्यजीव मंडल की टीम संभाग के एकमात्र वन्यजीव चिकित्सालय उपचार के लिए लेकर आती है। पिछले डेढ़ दशक से जिले में घायल वन्यजीवों को बचाने और शिकार की रोकथाम के लिए गश्त के लिए 2006 मॉडल के 15 साल पुराने दो जर्जर वाहनों का ही उपयोग किया जा रहा है। जोधपुर वन्यजीव मंडल की रेस्क्यू टीम को जोधपुर जिले के अलावा पूरे जोधपुर संभाग के जिलों में भी हिंसक वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए खटारा वाहनों का ही प्रयोग किया जा रहा है। वनविभाग के अधिकारी और वन्यजीव प्रेमी पिछले कई वर्षों से मुख्य वन संरक्षक, वन मंत्री और मुख्यमंत्री से जिले के वन्यजीवों को बचाने के लिए नए रेस्क्यू वाहनों की लगातार मांग कर रहे है लेकिन हजारों वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सरकार ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। ऐसे में ऑक्सन के लायक खटारा रेस्क्यू वाहनों का संचालन वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित होगा। कोरोना प्रथम लॉकडाउन में दोनों वाहनों दे चुके जवाबकोरोना प्रथम लॉकडाउन में वन्यजीव मंडल के दोनों रेस्क्यू वाहन पूरी तरह नाकारा साबित हो चुके है। उसके बाद उन्हें रंगरोगन और मरम्मत कर जैसे तैसे काम चलाया जा रहा था । एक साल बाद अब वाहन फिर से झालामंड स्थित एक वाहन सर्विस सेंटर में ठीक होने का इंतजार कर रहे है। वाहनों के समय पर नहीं पहुंचने से पर्यावरण प्रेमी होते है आक्रोशित जोधपुर जिले के वन्यजीव बहुल क्षेत्रों से बारिश के दिनों में श्वान के हमलों , सड़क दुर्घटना व अन्य कारणों से घायल चिंकारा व काला हरिण सहित छोटे नीलगाय के बच्चों के घायल होने की घटनाएं ज्यादा सामने आती है। घायल वन्यजीवों की सूचना तथा शिकार आदि की घटना होने पर रेस्क्यू टीम अथवा उडऩदस्ता समय पर नहीं पहुंचने से पर्यावरण प्रेमी आक्रोशित होकर रास्ते तक जाम कर देते है। रेस्क्यू टीम को इसका दंश भुगतना पड़ता है।
मानसून में हजारों वन्यजीवों को बचाने वाले रेस्क्यू वाहन फिर से नाकारा
रिपेयरिंग के लिए सर्विस सेंटर में खड़े रेस्क्यू वाहन

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