
फलोदी में आयोजित दूसरा दशक के शिविर में समूघ चर्चा करते हुए
आवासीय शिविर ने महिलाओं-किशोरियों को दिया शिक्षा का आत्मविश्वास
दूसरा दशक का आवासीय शिविर, ड्रॉप आउट महिलाओं दसवीं पास होने का सपना हुआ साकार
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
फलोदी. आवासीय शिविर किस प्रकार प्रतिभागियों की जिन्दगी में आत्मविश्वास भर नई राह दिखा सकता है। इसका बेहतरीन उदाहरण है फलोदी में दूसरा दशक द्वारा ड्रॉप आउट महिलाओं व किशोरियों को शैक्षिक संबल देने के लिए शुरू किया गया आवासीय शिविर। जहां साक्षर व ड्रॉप आउट किशोरियों व महिलाओं को प्रेरित कर राजस्थान स्टेट ओपन बोर्ड की १० वीं व १२ वीं की तैयारी करवाई गई। अब तक आयोजित हुए आवासीय शिविरों में करीब १०० से ज्यादा महिला परीक्षार्थी शामिल हुई। जिसमें से करीब ६२ फीसदी ने परीक्षा परिणाम में उत्तीर्ण होकर किसी ने अपना सालों पुराना सपना पूरा किया, तो किसी को आगे की पढ़ाई करने की राह मिली है। गौरतलब है कि राजस्थान स्टेट ओपन बोर्ड की अध्ययन व्यवस्थाएं लोगों के लिए एक पुल का काम कर रही है, जिनके लिए पढऩे के रास्ते बंद हो गए थे।
परिस्थितियों से जूंझते हुए मिली राह-
दूसरा दशक के आवासीय शिविर में अध्ययन करने वाली महिलाओं और किशोरियों का जीवन कई परिस्थितियों के कारण उलझा हुआ दिखा और इन परिस्थितियों ने उनके पढ़ाई से दूरी बनाने का मजबूर कर दिया। आखिर शिविर में आकर इन महिला परीक्षार्थियों ने शिक्षा की राह ढूंढ ही ली। फलोदी की कविता घर से स्कूल दूर होने के कारण ८ वीं तक ही पढ पाई, फिर यहां शिविर में आकर १० वीं उत्तीर्ण की। ननेऊ की लीला बहुत कम ही पढ़ी थी और शादी के कुछ साल बाद पति का निधन हो गया। अब अपने बेटे कैलाश को साथ लिए शिविर में पढकर १० वीं पास हो गई। इसी प्रकार ललिता ५ साल पहले माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में दो बार अनुतीर्ण होने के बाद शिविर में अध्ययन कर १० वीं उत्तीर्ण हुई। वहीं पुष्पा ५ वीं तक ही पढ़ सकी और पिता के निधन के बाद बनी परिस्थितियों के चलते ६ साल बाद स्वयं १० वीं पास हुई तथा विमला व आरती के पिता ने कर्ज लेकर आवेदन करवाया था। अब आरती १० वीं पा हो गई। इसी प्रकार अलग-अलग गांवों व शहर की कान्ता, दुर्गा, रेखा, प्रियंका, रजिया, संजू, जमना, विमला, चंदा, शारदा, पुष्पा, निरमा, कमला, जैना ने विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकलकर परीक्षा उत्तीर्ण की और अब उच्च अध्ययन की राह पर चल पड़ी है। शिविर में शिक्षिका कंचन, शैलजा, मनु, सुमित्रा, पार्वती, पूजा द्वारा अध्ययन करवाया गया। (निसं)
पांच सौ महिला परीक्षार्थियों का है लक्ष्य-
इस वक्त उच्च कक्षाओं में लड़कियों की संख्या बहुत कम है। दूसरा दशक के प्रयासों से करीब दो हजार ड्रॉप आउट लड़कियां व महिलाएं ओपन बोर्ड व वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा से जुड़ी है। सीमित साधनों के कारण केवल १०० परीक्षार्थियों को परीक्षा तैयारी में सहयोग किया जा सका। इस वर्ष जनसहयोग जुटाकर करीब पांच सौ महिला परीक्षार्थियों को विविध प्रकार से शैक्षिक सहयोग करने का लक्ष्य है।
मुरारीलाल थानवी, परियोजना निदेशक, दूसरा दशक, फलोदी
Published on:
21 Jun 2018 11:39 am

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