
फलोदी. बीमार कुरजां पक्षी
दरअसल वन्यजीव विभाग जोधपुर द्वारा मृत कुरजां के सैंपल देश की अलग-अलग लैबोरैट्री में जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से सैकॉन, कोयम्टूर की रिपोर्ट आ गई है और इस रिपोर्ट में मृत कुरजां के शरीर के अंगों में मोनोक्रोटोफॉस नामक रसायन पाया गया है। यह रसायन कीटनाशकों में प्रयुक्त होता है तथा पक्षियों के खाने के बाद उनके शरीर मे नुकसान पहुंचाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि सैकॉन, कोयम्टूर की रिपोर्ट में कुरजां के शरीर में कीटनाशक युक्त दाने से मौत का खुलासा किया गया है। जिसमें कुरजां के शरीर में मोनोक्रोटोफॉस नामक रसायन पाया गया है। उन्होंने बताया कि इस बार भी पिछली बार जैसे ही पक्षियों में लक्षण देखने को मिले है। उनका कहना है कि किसानों को कीटनाशकों का प्रयोग कम करना चाहिए तथा कीटनाशक का उपयोग करने के बाद पक्षियों के खेत में आने पर उन्हें इससे बचाना चाहिए।
क्या कहते है पक्षी विशेषज्ञ -
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. दाऊलाल बोहरा का कहना कि क्षेत्र में सरसों व चने की फसल में मोनोक्रोटोफॅस, फॉस्फामिडंस, डेल्टामेथ्रिन का अधिक उपयोग होता है। वहीं गेहूं में थायोफेनेट मिथाइल का उपयोग होता है। मोनोक्रोटोफॉस एक कीटनाशक है, जो पक्षियों व मनुष्यों के लिए एक्यूट विषाक्त है। इसलिए इसे यूएसए व यूरोप में प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह कीटनाशक पक्षियों की मृत्यु दर में वृद्धि के लिए प्रमुख कारक है। (कासं)------------
Published on:
01 Jan 2020 12:01 pm
