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जब्त खाद्य सामग्री के सैम्पल भेजे लैब, जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

-लोहावट व घंटाघर क्षेत्र मेंं हुई थी मिलावट के खिलाफ कार्रवाई
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Samples of seized food items sent labs, action after report

जब्त खाद्य सामग्री के सैम्पल भेजे लैब, जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

जोधपुर.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के केन्द्रीय दल व स्थानीय दल की होली से पहले लोहावट व जोधपुर शहर के घंटाघर क्षेत्र में की गई खाद्य सामग्री जांच के सैम्पलों को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया है। करीब 15 दिन में जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएचओ डॉ. बलवंत मंडा के अनुसार घंटाघर क्षेत्र में सीज की दुकान मालिक का दूसरे दिन फोन आया कि वह दुकान खोलना चाहता है और सैम्पल भी भरवाना चाहता है। इस पर मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और सीज दुकान को खोलकर मावा के सैम्पल लेने की कार्रवाई की गई। प्रथम दृष्टया दुकान मालिक का नौकर कार्रवाई के डर से दुकान बंद कर भाग गया था। सैम्पल की रिपोर्ट आने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


गौरतलब है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के केन्द्रीय दल जयपुर ने होली के एक दिन पहले मंगलवार को जोधपुर जिले के लोहावट में वाइयों की ढाणी में कार्रवाई की थी। यहां पूरा फैट निकला हुआ दूध मिला। जिसकी कीमत 10 रुपए प्रति किलो ही थी। एक किलो मावे में करीब 5 किलो दूध काम लिया जा रहा था। जिसमें सफेदी के लिए नॉन एडिबल हाइड्रो अखाद्य केमिकल डाला जा रहा था। इसके साथ ही तेल डालकर उसे मावे का रूप दिया जा रहा था। टीम ने माना कि यहां केमिकल व तेल को मिलाकर से बनाए जा रहे एक किलो मावे की लागत 70 से 80 रुपए किलो आती है। जिसे यहां से 100 रुपए किलो में बेचा जा रहा था। यही मावा मंडियों में 150 रुपए किलो में बेचा जाता है।

चिकित्सा विभाग के अनुसार जोधपुर जिले में दर्जनों यूनिट्स काम कर रही है। जो मिलावट के खाद्य पदार्थ बना रही है। सभी यूनिट आपस में जुड़ी हुई और यहां से जोधपुर, बीकानेर, बिलाड़ा, नागौर में मावे की आपूर्ति शादी, विवाह व समारोहों में होती है। इन सभी यूनिट तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। केन्द्रीय टीम की कार्रवाई से हड़कम्प मच गया था। यह भी सामने आया था कि अधिकतर युनिटों का आपस में जुड़ाव है। इसलिए एक जगह पर कार्रवाई हुई तो अन्य यूनिट संचालक ताला लगाकर भाग छूटे। लोहावट के चन्द्रनगर, मूलराज व हंसादेश मेंं चल रही किसी यूनिट के पास लाइसेंस भी नहीं मिला था।

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