
अण्डमान हो या लद्दाख, आर्मी के स्थानांतरण में हस्तक्षेप नहीं -सुप्रीम कोर्ट
जोधपुर. जोधपुर स्थित कोणार्क कोर (Konark Corps) में आर्मी की जज एडवोकेट जनरल (JAG) ब्रांच में कार्यरत कर्नल अमित कुमार और उनकी पत्नी कर्नल अनु डोगरा के स्थानांतरण (postings) मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने कहा कि स्थानांतरण के मामलों विशेषकर सशस्त्र बलों (Armed forces) में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। किसी को लद्दाख, अण्डमान व निकोबार और उत्तर पूर्व जैसे स्थानों पर जाना ही होगा और सेवा भी करनी होगी।
आर्मी हैडक्वार्टर (Army Headquarter) ने इस साल मई में कर्नल अमित का स्थानांतरण अण्डमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर और अनु का भटिण्डा किया था। दोनों के मध्य दूरी करीब 3500 किलोमीटर होने पर जैग कपल ने आर्मी मुख्यालय के सामने अपनी दलीलें पेश की, लेकिन आर्मी हैडक्वार्टर नहीं माना, तब कर्नल अमित ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए दोनों को अपने-अपने स्थान पर जॉइनिंग के लिए 15 दिन का समय दिया।
हाईकोर्ट के निर्णय पर कर्नल अमित ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील की। अमित की ओर से बताया गया कि उसके द्वारा जैग (JAG) के खिलाफ शिकायत करने पर दुर्भावनावश यह निर्णय किया गया है। दिल्ली में भी रिक्त जगह है जहां दोनों को स्थानांतरण किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय बैंच ने कहा कि अगर आर्मी ने दिल्ली में स्थानांतरण का विरोध किया तो यह और भी खराब होगा। आर्मी स्थानांतरण के मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए। बैंच में जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बैनर्जी भी शामिल थी।
देश में केवल 4 जैग कपल
अमित व अनु देश में प्रथम जैग कर्नल कपल है। भारत में केवल चार जैग कपल है जिसमें से अमित व अनु सबसे वरिष्ठ है। कर्नल अमित ने सोफिया मामले में मेजर आदित्य का केस लड़ा था और उत्तर-पूर्व में एनकाउंटर में फंसे कई आर्मी अफसरों को बचाया है।
Published on:
17 Nov 2020 06:36 pm
