
जोधपुर. सरकारी कर्मचारियों व अफसरों के वेतनमान के साथ अक्सर निजी स्कूलें अपनी फीस बढ़ाती आई हैं। विरोध करने पर कहा जाता है कि जिस प्रकार अभिभावकों की सैलेरी बढ़ी है, उसी अनुसार निजी स्कूलों की भी फीस बढ़ी है। सच्चाई तो ये हैं कि जोधपुर की आबादी में महज 1.75 फीसदी ही सरकारी कर्मचारी है। शेष आबादी को छठे-सातवें वेतनमान बढऩे से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जोधपुर में सभी सरकारी महकमों में कुल 28 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। शहर की आबादी 16 लाख हैं, ऐसे में सरकारी कर्मचारी 2 प्रतिशत भी पूरे नहीं है।
कोई नहीं सुनता
अभिभावक बताते हैं कि कई बार निजी स्कूल लूट के मामले में अति कर देते है। ऐसे में उन्हें मजबूरीवश काफी बार बोलना पड़ता है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। वहीं दूसरी ओर कई छोटे-बड़े व्यापारी व उद्योग संचालकों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। जिनकी आय अधिक रहती है, लेकिन कोरोनाकाल में उनके भी काम-धंधे ठप्प पड़े हैं। ऐसे में कोरोनाकाल में अधिकांश लोगों की हालत खराब है, ऐसे में अनावश्यक फीस भरना अभिभावकों के लिए बड़ा भार है।
Published on:
13 Nov 2020 10:59 pm
