9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ग़ाइड लाइन की तलवार से उलझन में मूर्तिकार

  गणपति की बड़ी मूर्तियों के अब तक कोई ऑर्डर नहीं, अब छोटी इॅको फ्रेण्डली मूर्तियों से ही उम्मीद
2 min read
Google source verification
ग़ाइड लाइन की तलवार से उलझन में मूर्तिकार

ग़ाइड लाइन की तलवार से उलझन में मूर्तिकार

जोधपुर. कोरोना के कारण लगातार आर्थिक संकट झेल रहे जोधपुर के मूर्तिकारों पर इस बार भी कोविड गाइडलाइन पालना की तलवार भारी पड़ रही है। गणपति उत्सव के लिए जोधपुर के अधिकांश कारीगरों की ओर से प्रतिमाओं का निर्माण कार्य बंद है। नाम मात्र मूर्तिकारों ने कर्ज लेकर सीमित इॅको फ्रेण्डली मूर्तियां तो बनाई है लेकिन बड़ी मूर्तियों का एक भी ऑर्डर अब तक नहीं मिला है। बंगाली कारीगरों की ओर से निर्मित की जाने वाली इको फ्रेंडली मूर्तियों का निर्माण कार्य भी पिछले साल से बंद है। सिवांची गेट प्रताप नगर रोड भीखा प्याऊ क्षेत्र के मूर्तिकार शंकर चौहान ने बताया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर पहले से ही प्रतिबंध और फिर कोरोना महामारी के कारण आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा थी। इस बार उम्मीद थी गणपति उत्सव तक सब कुछ ठीक हो जाएगा, इसीलिए कर्ज लेकर मूर्तियों का निर्माण करवाया है लेकिन गाइडलाइन में उत्सव के आयोजन पर प्रतिबंध के कारण बड़ी मूर्तियों का ऑर्डर नहीं मिला है।

पांच गुणा महंगी
प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित मूर्तियों की तुलना में इॅको फ्रेण्डली मूर्तियों की लागत करीब पांच गुणा ज्यादा होती है।

इसाइयों के कब्रिस्तान क्षेत्र में मूर्तियों का निर्माण करने वाले सुरेश ने बताया कि गणपति पूजन के लिए इस बार घरों में स्थापित होने वाली इॅको फ्रेण्डली मूर्तियों को लेकर बड़ी उम्मीद है ।

मिट्टी की समस्या से बढ़ रही लागत
मूर्तिकार शंकर ने बताया कि इॅको फ्रेण्डली मूर्तियों के निर्माण के लिए चिकनी मिट्टी का मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में हमें गुजरात और कोलकाता से माटी मंगवाने के कारण एक मूर्ति की लागत कई गुणा बढ़ जाती है। एक सदस्य पूरे दिन में केवल ही मूर्ति तैयार कर पाता है। दो साल पहले तक प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित एक फीट की मूर्ति 250 से 300 रूपए में बिकती थी जबकि उसी आकार की इॅको फ्रेण्डली मूर्ति वर्तमान में डेढ़ हजार से दो हजार में बेचना पड़ रहा है। शंकर ने बताया कि परिवार के 10 से 12 सदस्य मूर्तियों का निर्माण में जुटे है। बड़ी मूर्तियों का ऑर्डर जोधपुर से एक भी नहीं मिला है। ऐसे में चिंतित मूर्तिकार परिवार के सदस्यों को छोटी इॅको फ्रेण्डली मूर्तियों से ही बेड़ा पार लगने की उम्मीद है।

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग