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ऐसा डर कि बेटी के साथ मां भी सीख रही कराटे

समाज में व्याप्त उस डर से बाहर निकलने की कोशिश है, जिससे पूरा देश आहत है
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ऐसा डर कि बेटी के साथ मां भी सीख रही कराटे

ऐसा डर कि बेटी के साथ मां भी सीख रही कराटे

जोधपुर। सीखने की ऐसी लगन कि बेटी के साथ मां भी पूरा समय दे रही है। पूरी तन्मयता...एकाग्रता। यहां कोई पढ़ाई-लिखाई और कोचिंग नहीं है बल्कि समाज में व्याप्त उस डर से बाहर निकलने की कोशिश है, जिससे पूरा देश आहत है। यह नजारा है इन दिनों पुलिस लाइन स्थित महिला शक्ति आत्मरक्षा केन्द्र का। इसे महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों का डर कहें या फिर जज्बा व हौसला। महिला शक्ति आत्मरक्षा प्रशिक्षण केन्द्र के उद्घाटन के पहले दिन ही यहां न केवल बेटियां बल्कि उनकी माताएं भी प्रशिक्षण ले रही है। यहां महज १० से १५ वर्ष की बालिकाओं ने इसमें पंजीयन कराया। एक महिला यहां अपने दो बेटियों के साथ आई। पहले लगा कि वह अपनी बेटियों को आत्मरक्षा सीखा रही है लेकिन जब वह स्वयं सीखने लगी तो हैरत हुई। बाद में बातचीत में उसने बताया कि वह गृहिणी है। उसके १३ वर्ष की दो जुड़वा पुत्रियां है। दोनों बेटियां अपनी रक्षा स्वयं कर सकें, इसके लिए उनका पंजीयन करवाया। लेकिन बेटियों ने साथ चलने के लिए कहा तो अब वह भी बेटियों के साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण ले रही है। इसी तरह प्रतापनगर की एक महिला ने बताया कि मुझे देख, मेरी बेटी भी सीखेंगी, इसलिए वह यहां ट्रेनिंग ले रही है। वह प्राइवेट जॉब करती है। आए दिन युवतियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं के मद्देनजर वह अपनी बेटी को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिला रही है। लेकिन बेटी अकेले जाने में हिचक रही थी। इस पर वह स्वयं प्रशिक्षण लेने आई ताकि उसे देखकर बेटी व छोटी बहन भी प्रशिक्षण लें

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