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Shakespeare Day : शैक्सपियर के चाहने वाले जोधपुर में भी कम नहीं हैं

जोधपुर की यादों के आईने के एलबम में बसे सजे शैक्सपियर Research :

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जोधपुर

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MI Zahir

Apr 23, 2018

JKK Jaipur

Shakespeare Day

जोधपुर .

जिंदगी एक रंगमंच है और हम सब रंगमंच की कठपुतलियां। ऊ पर वाला कब किसके जीवन की डोर ऊ पर खींच ले, कुछ पता नहीं। फिल्म आनंद में आनंद किरदार के रूप में राजेश खन्ना के मुंह से बोला गया यह डायलॉग अंग्रेजी के विश्वप्रसिद्ध कवि व नाटककार शैक्सपियर की याद दिलाता है।

चाहने वाले कम नहीं हैं

शैक्सपियर को एक अजीम कवि और नाटककार के रूप में तो सब जानते हैं। उन पर करीब ४ लाख किताबें लिखी गई हैं। जोधपुर में भी शैक्सपियर के कद्रदान और चाहने वाले कम नहीं हैं। वक्त के साथ संस्थाएं, व्यक्ति और कलाकार बदलते गए, लेकिन उनकी रचनाओं पर कुछ कलात्मक और रचनात्मक कार्य करने का जुनून कायम रहा। जोधपुर में शैक्सपियर को युवा पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने में यहां के विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग का योगदान अहम है। अगर इस डिपार्टमेंट के शिक्षाविद अपनी अकादमिक जिम्मेदारियों के साथ शैक्सपियर के नाटकों का मंचन करने का बीड़ा न उठाते तो शैक्सपियर के चाहने वाले 'यादा नहीं होते।

उसे जीना अलग बात

अंग्रेजी साहित्य के प्राध्यापक, अध्येता और विद्यार्थी तो बहुत हुए हैं, लेकिन एक रचनाकार और विशेषकर शैक्सपियर की कृतियों से बहुत प्यार करना और उसे जीना अलग बात है। जोधपुर के जॉन और कपूर दो परिवारों ने तो शैक्सपियर को जिंदा रखा। पहले प्रो वी वी जॉन के बड़े बेटे जॉर्ज जॉन और बाद में उनके छोटे बेटे अब्राहम जॉन ने इस रचनाकार की रचनाओं पर थिएटर के कारनामे अंजाम दिए।

शैक्सपियर के खूब ड्रामे किए

अब्राहम जॉन ने शैक्सपियर के खूब ड्रामे किए। उनका यह काम संगे मील की हैसियत रखता है। जॉन ने अमृत नाहटा और प्रो डी डी हर्ष के साथ मिल कर सन १९५० से १५४ के बीच जसवंत कॉलेज में शैक्सपियर के नाटक मंचित किए। उनमें से कुछ नाटकांे में प्रो. मोहनस्वरूप माहेश्वरी ने भी काम किया। प्रो एस डी कपूर ने शैक्सपियर की कविताओं और नाटकों के हवाले से खूब और यादगार काम किया।

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इंग्लैण्ड से आए थे पीटर

प्रो एसडी कपूर ने विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष के रूप में इंग्लैंड से एक ट्रेनर पीटर को आमंत्रित किया। यह 1994.95 की बात है। अंग्रेजी विभाग में अंग्रेजी साहित्य के छात्रों ने सोनेट्स और आत्मभाषण पढ़ा। वे तीन दिन विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस में रहे थे।

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अब बात फिल्मों के हवाले से

बॉलीवुड में शैक्सपियर पर पहली फिल्म किशोर साहू ने बनाई थी। किशोरकुमार और असित सेन अभिनीत दो दुनी चार और संजीवकुमार, मौसमी चटर्जी व देवन वर्मा अभिनीत फिल्म अंगूर फिल्म शैक्सपियर की रचनाओं पर बनी थीं। अंगूर फिल्म तो शैक्सपियर की कृति कॉमेडी ऑफ एैरर्स पर आधारित थी। अंग्रेजी फिल्मों की बात करें तो हॉलीवुड में बरसों पहले जापानी फिल्मकार कुरोसावा ने शैक्सपियर के नाटक मैकबैथ पर थ्रोन ऑफ ब्लड फिल्म बनाई थी।

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शैैक्सपियर फिल्म फेस्टिवल

जोधपुर फि ल्म सोसाइटी की मेजबानी में प्रो एसडी कपूर और प्रो मोहनस्वरूप माहेश्वरी के मार्गदर्शन में ७ जृून २०१३ से १६ जून २०१३ तक शेक्सपियर शैैक्सपियर फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया था। इसमें ओथेलो, रिचर्ड थर्ड, मर्चेंंट ऑफ वीनस, हेमलेट और मैक्सिको की बैकयार्ड और द अदर साइड फिल्मों का प्रदर्शन किया गया था।

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मेहरानगढ़ में ताजा हुईं शैैक्सपियर की यादें

मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के डायरेक्टर करणीसिंह जसोल बताते हैं कि लंदन की थिएटर कंपनी आउट ऑॅफ कोकून थिएटर और मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की की साझा मेजबानी में शेक्सपियर लिखित व जर्का हेलर निर्देशित नाटक मैकबेथ का 11 फ रवरी 2010 से 23 फ रवरी 2010 तक मंचन किया गया था। मेहरानगढ दुर्ग में प्रस्तुत किए गए शेक्सपियर के नाटक की यह तीसरी शृंखला थी। गु्रप ने पहले मेहरानगढ़ दुर्ग में पहले साल ट्वैल्थ नाइट, ८ से १९ फरवरी २००९ में मीजर ऑफ मीजर और ११ से २३ फरवरी २०१० में मैकबैथ नाटक का मंचन किया था।

मैकबेथ पर आधारित बॉलीवुड मूवी

बॉलीवुड मूवी मकबूल भी मैकबेथ पर आधारित थी। आउट ऑॅफ कोकून थिएटर कम्पनी के आर्टिस्टिक डायरेक्टर ने इसका सेटअप किया था। वहीं वर्ष 2004-5 में सह निर्देशित और वर्ष 2006.-७, 2008-9 में निर्देशित किया। संगीत निर्देशन गाबरिला माग्र्यूलिस व रिचर्ड ए लौक ने किया था।

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सनसिटी के स्कूल में शैक्सपियर

शहर के कॅालेजों और स्कूलों के वार्षिकोत्सव में बरसों से शैक्सपियर के नाटकों का मंचन होता रहा है। जोधपुर के राजमाता कृष्णा कुमारी स्कूल में अगस्त 2010 में शेक्सपियर के नाटकों पर विशेष रूप से आधारित एक अंतरविद्यालय नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें मेयो स्कूल अजमेर की टीम ने भी भाग लिया था।

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शैक्सपियर अथॉरिटी भी हैं शहर में

अंग्रेजी साहित्य के आलोचक और शैैक्सपियर पर अथॉरिटी प्रो. एस डी कपूर के शब्दों में, प्रो जॉर्ज जॉन ने सन 1990-91 के दौरान शैक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक मर्चेंट ऑफ वीनस का निर्देशन किया था। उन्होंने कुछ युवाओं और करीबी दोस्तों के साथ यह कार्य अंजाम दिया। बाद में ईएमआरसी ने इस पर २९ मिनट का वृत्तचित्र बनाया। नाटक में जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने काम किया था। वहीं सूर्या वीर सिंह ने शाइलॉक और सुनील ने एंटोनियो के रूप में काम किया।

शैक्सपियर के नाटकों का मंचन

लंदन की थिएटर कंपनी आउट ऑफ कोकून की ओर से भारत के शहरों में शैक्सपियर के नाटकों का 2005 में मंचन शुरू किया था। उदयपुर , जयपुर और जोधपुर में नाटकों की एक शंृखला का प्रदर्शन किया। उनमें से प्रत्येक नाटक का मिस हेलर ने निर्देशन किया था।

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शैक्सपियर पर सेमिनार

अंग्रेजी की लेखिका और जोधपुर में १६ से १८ नवंबर २०१५ तक जोधपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर सेमिनार की निदेशक डॉ. सुधि राजीव के शब्दोंं में, जोधपुर में शैक्सपियर को चाहने वाले बहुत हैं। उन पर जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी से किसी ने पीएचडी तो नहीं की, अलबत्ता एलिजाबेथियन एज विषय पर पीएचडी जरूर हुई है। एमए अंग्रेजी में शैक्सपियर और उनके समकालीन पेपर भी है। बहरहाल अगर हम ये कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि शैक्सपियर जोधपुर की यादों में बसा और यादों के आईने में सजा हुआ है।

Content by M. I. Zahir

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