
Brama Lotus : प्राकृतिक वनस्पति व जड़ी-बूटियां को खराब न करें, कई जड़ी-बूटियों का दुष्प्रभाव भी हो सकता है।

यात्रा के लिए फिट होना जरूरी- यात्रा कर लौटे जोधपुर के नेचुरोपैथी विशेषज्ञ रविकांत रांकावत व योगगुरु रचना रांकावत ने बताया कि किसी भी पूर्व तैयारी के बिना यहां की यात्रा करना बेहद ही मुश्किल भरा हो सकता है। जिन्हें श्रीखण्ड की यात्रा करनी हो, वो सबसे पहले फिट होना चाहिए। यदि कोई फिट नहीं है तो पहाड़ों की ऊंचाई चढऩा मुश्किल होगा और बीच रास्ते में तबीयत खराब हो सकती है। इसलिए छह माह पूर्व से शारीरिक व्यायाम का अभ्यास कर लेना चाहिए। जो लोग नियमित रूप से योग और शारीरिक व्यायाम करते हैं, उन्हें श्रीखण्ड यात्रा में कम परेशानी होगी।

यह जगह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आती है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए शिमला के जाओ गांव की तरफ से ही जाना पड़ता है। नैसर्गिंक सौन्दर्य के बीच पैदल ट्रेकिंग यानि पगडंडी का रास्ता इतना मुश्किल है कि अधिकतर जगहों पर पत्थरों को लांगते हुए सीधी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। ऐसे में अधिकतर लोग या तो बीच रास्ते में ही अस्वस्थ हो जाते हैं या फिर बीच रास्ते से ही लौट आते हैं।

18570 फीट ऊंचाई पर बना है प्राकृतिक शिवलिंग अमरनाथ यात्रा में जहां लोगों को करीब 14 हजार फीट ऊंचाई चढऩी पड़ती है। वहीं श्रीखण्ड महादेव के दर्शन के लिए यात्रियों को 18 हजार 570 फीट ऊंचाई चढऩी पड़ती है। करीब 25 किलोमीटर की ऊंचाई सीधी होने के कारण यात्रियों की रूह तक कांप उठती है। श्रीखण्ड में प्राकृतिक शिवलिंग की ऊंचाई 72 फीट है। यह भी किसी चमत्कार से कम नहीं हैं कि श्रीखण्ड के चारों तरफ बर्फ जम जाती है, लेकिन श्रीखण्ड के शिवलिंग पर कभी बर्फ नहीं जमती। पौराणिक मान्यता है कि यहां श्रीखण्ड में भगवान शिव का वास है। श्रीखण्ड महादेव ग्रेट हिमालयन के नेशनल पार्क से सटा है। श्रीखण्ड से कुछ पहले भगवान शिव, पार्वती, कार्तिकेय व गणेश की प्रतिमाएं भी हैं।

यह जगह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आती है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए शिमला के जाओ गांव की तरफ से ही जाना पड़ता है। नैसर्गिंक सौन्दर्य के बीच पैदल ट्रेकिंग यानि पगडंडी का रास्ता इतना मुश्किल है कि अधिकतर जगहों पर पत्थरों को लांगते हुए सीधी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। ऐसे में अधिकतर लोग या तो बीच रास्ते में ही अस्वस्थ हो जाते हैं या फिर बीच रास्ते से ही लौट आते हैं।