9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कहीं आप तो नहीं खरीद रहे ‘मौत के हेलमेटÓ

  -सुरक्षा या फि र ट्रैफि क पुलिस से बचने के लिए लोग खरीद रहे घटिया क्वालिटी के हेलमेट  
2 min read
Google source verification

जोधपुर

image

Amit Dave

May 07, 2019

jodhpur

कहीं आप तो नहीं खरीद रहे 'मौत के हेलमेटÓ

जोधपुर।

हम समझते है कि जान है तो जहान है फि र भी कई लोग अपने सिर पर खुलेआम मौत के हेलमेट लगाकर घूम रहे है तो इसमें काहे की समझदारी। परिवहन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल व मृतक 100 वाहन चालको में करीब 40 फ ीसदी बिना हेलमेट होते है। शेष 60 फ ीसदी वाहन चालको में से 25 फ ीसदी ऐसे चालक होते हैं जिन्होंने सस्ते हेलमेट लगाया है। वहीं पुलिस के सड़क दुर्घटना रिपोर्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में जितने लोग घायल हुए है या जिनकी जिंदगी सड़कों के हवाले हो गई है। उनमें से अधिकतर वे लोग रहे है जिन्होंने या तो हेलमेट पहना ही नहीं है या फि र बहुत घटिया स्तर का पहना है धड़ल्ले से बिक रहे घटिया हेलमेटसड़कों पर नकली आइएसआइ मार्क वाले और घटिया हेलमेट धड़ल्ले से बिक रहे है। पुलिस को इस बात की ज्यादा चिंता नहीं है कि कौनसे बाइक सवार ने असली पहना या नकली हेलमेट, बस सिर पर टोपिया लगा दिखना चाहिए। लोगों की जान से ज्यादा पुलिस चालान पर जोर देती रही है । पुलिस और परिवहन विभाग के जिम्मेदार न तो घटिया हेलमेट की बिक्री करने वालों पर रोक लगा रहे है और न ही उन पर कोई कार्यवाही कर रही है। पुलिस हेलमेट नहीं पहनने वालों के खिलाफ कार्यवाही तो कर रही है लेकिन वह इस पहलु को नजरअंदाज कर रही है कि हेलमेट ब्रांडेड है या फि र नॉन ब्रांडेड। मतलब साफ है पुलिस का टारगेट चालान है ना कि सेफ्टी।

यह फ ायदा है आइएसआइ मार्का हेलमेट का

ब्रांडेड कंपनियों के हेलमेट फ ाइबर से तैयार होते है और इनकी बॉडी की गारंटी कंपनियां लेती है। आइएसआइ मार्का हेलमेट के अंदर की ओर थर्माकोल और बाहर की ओर स्टील लगी होती है, जो चोटों से बचाता है। इसमें आगे की ओर लगा मजबूत माउथगार्ड चेहरे की हिफ ाजत करता है। इनकी कीमत 700 से 1500 रुपए तक हो सकती है। इनकी बाकायदा रसीद और गारंटी भी मिलती है। वहीं सस्ता हेलमेट 150 से 250 रुपए तक मिल जाते है। सस्ते दाम पर बिक रहे हेलमेट पर किसी कंपनी का नाम नहीं होता है। नकली हेलमेट में आइएसआइ मार्क अजीब सा दिखता है। इसकी प्रिंटिंग भी ठीक नहीं होती है। यह हेलमेट प्लास्टिक का बना होने से हल्का होता है। इसकी खरीदारी की कोई रसीद और गारंटी नहीं मिलती।

एेसे होती है ब्रांडेड हेलमेट की जांच

कंडीशनिंग टेस्ट - हेलमेट को 50 डिग्री के तापमान पर 4 घंटे के लिए रखा जाता है और फि र इतने ही समय 20 डिग्री पर।

अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन चेक- 48 घंटे तक 125 वॉट के जिनोफ ाइड लैंप की रोशनी में रखा जाता है।

नमी का परीक्षण- 4 घंटे पानी के तेज बहाव में रखा जाता है।

आघात परीक्षण- 5 किलोग्राम का भार ढाई मीटर की ऊंचाई से पूरी ताकत से डाला जाता है।

--

मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार घटिया क्वालिटी का हेलमेट पहनने वाले चालक पर कार्यवाही का प्रावधान है। विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है। विभाग की दुपहिया वाहन चालकों से आइएसआइ मार्का व ब्रांडेड हेलमेट ही पहनने की अपील है।

राजेन्द्र दवे, जिला परिवहन अधिकारी जोधपुर

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग