white grub--‘सफेद लट ’ व ‘टिड्डी’ के साए में मूंगफली की बुवाई खतरे में

- जिले में 1.50 हैक्टेयर का बुवाई लक्ष्य

- जिले में कुल सिंचित क्षेत्र के ३३ प्रतिशत हिस्से में होती है मूंगफली

By: Amit Dave

Updated: 26 Jun 2020, 10:34 PM IST

जोधपुर।

जिले में बड़े पैमाने पर पैदा होने वाली मूंगफ ली की फ सल दोहरा खतरा मंडऱा रहा है। कृषि विभाग द्वारा क्षेत्र में एक लाख पचास हजार हैक्टेयर में मूंगफ ली का बुवाई लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन मूंगफ ली की सबसे बड़ी दुश्मन सफेद लट (वाइट गर्ब) का खतरा बढ़ रहा है। वहीं इस बार टिड्डी के रूप में दोहरा संकट किसानों के सामने है। किसान इन कीटों के खतरे के साए में मूंगफ ली की बिजाई में लगे हुए है।

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सिंचित क्षेत्र के ३३ प्रतिशत हिस्से में बुवाई

जिले में सिंचित क्षेत्र के 33 प्रतिशत हिस्से में मूंगफ ली की फ सल बोई जाती है। जिले के लोहावट, बापिणी, देचू, फ लोदी, सेखाला व ओसियां क्षेत्र में प्रमुख रूप से मूंगफ ली की खेती की जाती है। गत कई वर्षों से सफेद लट (वाइट गर्ब) कीट का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इससे दाना पडऩे से पहले ही ये कीट फ सल को चट कर जाता है। इस बार गोजा लट के साथ साथ टिड्डी भी किसानों के लिए बड़ा खतरा बन कर उभरी है। क्षेत्र में मूंगफ ली के अंकुरित होते ही टिड्डी द्वारा चट करने की घटनाएं सामने आ रही है। सफेद लट ने गत वर्ष लोहावट व बापिणी सहित कई तहसीलों में हजारों किसानों के खेतों से मूंगफ ली की फ सल को पूरी तरह नष्ट कर दिया था।

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गत कई वर्षो से सफेद लट से मूंगफली की फसल खराब हो रही है। इस बार सफेद लट व टिड्डी का दोहरा खतरा है।

तुलछराम सिंवर, प्रांत प्रचार प्रमुख

भारतीय किसान संघ

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मूंगफली की फ सल को सफेद लट से बचाने के लिए किसानों को पहली मानसून बरसात के समय ही प्रयास करने होंगे। किसानों को इमिडक्लोरोपिड व पानी के मिश्रण का उपयोग करना चाहिए।

वीएस सोलंकी, उप निदेशक

कृषि विस्तार जोधपुर

Amit Dave Reporting
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