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Minimum Support Price : राज्य ने पिछले तीन सालों में नहीं भेजा एमएसपी पर बाजरा खरीद का वैध प्रस्ताव

प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बाजरा की खरीद नहीं करने के मामले में भाजपा के निशाने पर आई राज्य सरकार को अब केंद्र सरकार ने भी घेर लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका में दाखिल केंद्र के शपथ पत्र में यह खुलासा हुआ है कि राज्य सरकार ने पिछले तीन सालों में गाइडलाइन के अनुरूप बाजरा खरीद का कोई वैध प्रस्ताव नहीं भेजा।
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Minimum Support Price  : राज्य ने पिछले तीन सालों में नहीं भेजा एमएसपी पर बाजरा खरीद का वैध प्रस्ताव

Minimum Support Price : राज्य ने पिछले तीन सालों में नहीं भेजा एमएसपी पर बाजरा खरीद का वैध प्रस्ताव

राज्य ने पिछले तीन सालों में नहीं भेजा एमएसपी पर बाजरा खरीद का वैध प्रस्ताव: केंद्र
केंद्र के शपथ पत्र में हुआ खुलासा

जोधपुर. प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बाजरा की खरीद नहीं करने के मामले में भाजपा के निशाने पर आई राज्य सरकार को अब केंद्र सरकार ने भी घेर लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका में दाखिल केंद्र के शपथ पत्र में यह खुलासा हुआ है कि राज्य सरकार ने पिछले तीन सालों में गाइडलाइन के अनुरूप बाजरा खरीद का कोई वैध प्रस्ताव नहीं भेजा। शपथ पत्र में केंद्र सरकार ने यह प्रतिबद्धता भी जाहिर की है कि खरीद कार्य पर किए गए संपूर्ण व्यय का अनुमोदित लागत के अनुसार भुगतान किया जाएगा। किसान वेलफेयर सोसायटी ने एमएसपी पर बाजरा की खरीद नहीं करने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। पूर्ववर्ती सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि यदि एमएसपी पर राज्य सरकार बाजरा की खरीद करती है तो क्या केंद्र खरीद पर किए गए खर्च की भरपाई करने को तैयार है। इसके जवाब में केंद्र के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के उप सचिव ने शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी की एमएसपी पर खरीद की गाइडलाइन जारी की गई थी। हालांकि,यह खरीद राज्य सरकारों को करनी थी, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को विस्तृत खरीद योजना की केंद्र से मंजूरी लेनी आवश्यक थी। इस अनाज को खरीद के बाद लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास योजना तथा मिड डे मील योजना में इस्तेमाल किया जाना था। इस गाइडलाइन को बाद में वर्ष 2020, 2021 तथा मौजूदा वर्ष में संशोधित किया गया है। संशोधन के बाद अब मक्के के वितरण की अवधि 3 माह से बढ़ाकर छह माह, ज्वार और बाजरा की नौ माह तथा रागी की दस माह बढ़ा दी गई है, ताकि अनाज के भंडारण और वितरण में ज्यादा समय मिल सके।

राज्य सरकार की जिम्मेदारी

गाइडलाइन में एफसीआई के माध्यम से सरप्लस बाजरा के दूसरे राज्यों में परिवहन के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक मार्केटिंग सीजन में उत्पादन का मूल्यांकन, बाजार में सरप्लस रहने की स्थिति तथा मूल्य का आकलन समय रहते करें और एमएसपी पर खरीद का विस्तृत प्लान अनुमोदन के लिए केंद्र सरकार को भिजवाए।

कई राज्यों ने तीन सालों में खरीदा बाजरा

केंद्र ने शपथ पत्र में पिछले तीन सालों में हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उड़ीसा तथा महाराष्ट्र राज्यों में बाजरा, मक्का आदि के एमएसपी पर खरीद के आंकड़े भी पेश किए हैं, जबकि राजस्थान सरकार ने पिछले तीन सालों में बाजरा सहित मक्का या ज्वार के एमएसपी पर खरीद का कोई वैध प्रस्ताव गाइडलाइन के अनुसार नहीं भेजा। इन अनाजों की खरीद बढ़ाने के लिए केंद्र ने 31 मई और 10 अगस्त को राज्य सरकारों को पत्र भी लिखे हैं। शपथ पत्र के अनुसार केंद्र खरीद योजना को अनुमोदित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए खरीद केंद्र स्थापित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

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