अवैध खनन में जब्त पत्थर चार साल बाद भी नहीं हो सके नीलाम

चार ब्लॉक में करीब 200 से अधिक खदानों में जब्त पत्थर

By: Nandkishor Sharma

Published: 30 Jun 2020, 11:56 PM IST

जोधपुर. बेरीगंगा वन क्षेत्र में लंबे अर्से से चल रहे अवैध खनन को खनन माफियाओं के चंगुल से मुक्त करने के लिए विभाग की ओर से खींची गई लक्ष्मण रेखा अब धीरे धीरे धूमिल हो चुकी है। चार साल पहले बेरीगंगा वन खंड के 118.82 हेक्टेयर वन भूमि के ब्लॉक मंडोर किला , मगजी घाटी, ब्राह्मणों का टांका व गऊ घाटी में अवैध खनन रोकने के लिए आवागमन के सभी रास्तों पर लक्ष्मण रेखा के रूप के खाई खोदने के साथ विशाल पत्थरों से रास्ता बंद कर दिया था। वर्तमान में लक्ष्मण रेखा पाटने से बेरीगंगा क्षेत्र में फिर से अवैध खनन की उल्टी गंगा बहने की संभावना बढ़ गई है।

नहीं हो सके जब्त नीलाम पत्थर
राजस्थान पत्रिका में बेरीगंगा में अवैध खनन को लेकर प्रकाशित समाचारों को आधार बनाते हुए जोधपुर के पर्यावरण प्रेमी रामजी व्यास की ओर दायर जनहित याचिका के निर्णय में उच्च न्यायालय ने 15 मई 2012 को बेरीगंगा क्षेत्र में अवैध खनन के लिए रोक लगा दी थी। लेकिन सभी आदेश कागजों में ही सीमित रहे। पत्रिका में लगातार अवैध खनन को लेकर प्रकाशित समाचारों के बाद वनविभाग के सहायक वन संरक्षक देवेन्द्रसिंह भाटी के नेतृत्व में 15 मार्च 2016 को पहली बड़ी कार्रवाई की गई। बेरीगंगा वनक्षेत्र में चार ब्लॉक में करीब 200 से अधिक खदानों में पड़े पत्थर व प्रस्तरों को राजकीय तहवील में लेकर उन सभी प्रस्तरों पर मय नाप व नम्बरिंग कर फॉरेस्ट डिपार्टमेन्ट लिख दिया गया। वन संरक्षण अधिनियम के तहत जब्त सभी प्रस्तर और विशाल पत्थर नीलाम किया जाना था लेकिन चार साल से अधिक समय बीत चुका है और पत्थरों पर लिखे नम्बर भी मिटने लगे है।
इनका कहना है

बेरीगंगा वन क्षेत्र में जब्त पत्थरों को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण अटका हुआ है। पत्थरों की देखभाल के लिए वनकर्मी नियमित नजर रखे हुए है।
अशोक कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी मंडोर

Nandkishor Sharma Desk
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