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30 डिग्री तापमान से टूटेगी स्वाइन फ्लू की कमर

-चिकित्सकों ने कहा कि गर्मी बढऩे पर कम हो जाएगा स्वाइन फ्लू का असर -स्वाइन फ्लू से अब तक 43 मरीजों की मृत्यु
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Swine flu will break from 30 degree temperature

30 डिग्री तापमान से टूटेगी स्वाइन फ्लू की कमर

जोधपुर.
शहर में मंगलवार को मौसम में आए बदलाव से स्वाइन फ्लू से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। चिकित्सकों का मानना है कि दिन के समय 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर चार से पांच-छह दिन में स्वाइन फ्लू का असर लगभग खत्म हो जाएगा। क्योंकि 30 डिग्री तापमान पर स्वाइन फ्लू का वायरस जिन्दा नहीं रहता।


एसएन मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ. नवीन किशोरिया के अनुसार गर्मी के बढऩे पर स्वाइन फ्लू का असर कम होगा। क्योंकि अधिक तापमान में एच1एन1 वायरस सक्रिय नहीं रह पाता। और गर्मी के कारण मरीज की एंटीबॉडीज में भी वृद्धि होने लगती है। हालांकि पिछले सप्ताह की तुलना में अब पॉजीटिव मरीजों की संख्या में कमी आई है। मंगलवार को दिन के तापमान में वृद््िध हो गई। लोगों को धूप चुभने लगी। दिन का तापमान 24-25 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया और 30 डिग्री का तापमान पहुंचने पर स्वाइन फ्लू का वायरस वैसे ही निष्क्रिय हो जाएगा। आगामी दिनों में यदि चार दिन ऐसी ही गर्मी रही तो स्वाइन फ्लू कम हो जाएगा। गौरतलब है कि जोधपुर जोन में इस साल जनवरी माह से अब तक 2057 सैम्पलों की जांच की गई। जिसमें से 598 मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई। पॉजीटिव मरीजों में सेे अब तक 43 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है।


न मरीजों की केस स्टडी तैयार हो रही, न सुधारे हालात
-चिकित्सा मंत्री व प्रमुख शासन सचिव के निर्देशों पर भी नहीं हुए गंभीर
जोधपुर.
शहर में स्वाइन फ्लू के कारण लगातार हो रही मौतों को लेकर कुछ दिन पहले चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा एवं चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत गेरा ने अस्पतालों का निरीक्षण किया था। उस समय स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों ने इसको गंभीरता से नहीं लिया। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के वार्डों की व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही है।
्प्रमुख शासन सचिव हेमंत गेरा ने संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मौतों पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि मरीज एमडीएम अस्पताल में देरी से क्यों पहुंच रहे हैं, इससे पहले वो कहां पर इलाज लेते हैं या उनकी पूर्व की हिस्ट्री क्या रहती है, इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएं। गेरा ने एमजीएच के निरीक्षण के दौरान ऑर्थोपेडिक ओपीडी में मरीजों की कतार देख टोकन व्यवस्था शुरू कराने, मरीजों के बैठने एवं शौचालय की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एमडीएम एवं एमजीएच प्रशासन की ओर से प्रमुख सचिव के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने भी एमडीएम अस्पताल का निरीक्षण कर सुधार के निर्देश दिए थे। मंत्री ने चिकित्सा अधिकारियों से जवाब भी मांगा था कि जयपुर में भी पॉजीटिव मरीज आ रहे हैं, लेकिन वहां उतनी मौतें नहीं हो रही, जितनी जोधपुर में हो रही है। तो क्या जोधपुर में मरीजों की केयर अच्छे नहीं हो रही? मंत्री के इस सवाल पर चिकित्सा अधिकारी अपना बचाव करते दिखे थे, लेकिन हकीकत स्तर पर अस्पताल में सुधार की तरफ कोई प्रयास नहीं किए। दोनों ही अस्पतालों के हालात विकट सामने आ रहे हैं। मरीजों को चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई मरीजों ने बताया कि स्वाइन फ्लू वार्डों में वरिष्ठ चिकित्सक आने से भी परहेज करते हैं। रात के समय वार्डों की स्थिति भगवान भरोसे रहती है।

एक और मरीज की मृत्यु, बाड़मेर में अधिक पॉजीटिव
-फलोदी निवासी महिला मरीज की मृत्यु
जोधपुर.
स्वाइन फ्लू ने मंगलवार को एक और महिला मरीज की जान ले ली। फलोदी निवासी स्वाइन फ्लू पॉजीटिव महिला ने एमडीएम अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में 50 मरीजों के सैम्पलों की जांच की गई। जिसमें से 12 मरीजों की रिपोर्ट स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आई है।
रिपोर्ट के अनुसार फलोदी निवासी 25 वर्षीय जीनत की मृत्यु हो गई। गत दिनों जीनत को स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां सैम्पल की जांच में जीनत की रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। पॉजीटिव मरीजों में 8 मरीज बाड़मेर एवं 4 मरीज जोधपुर जिले के हैं।

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