
कायलाना के कायाकल्प में फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट की तलवार
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट और उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना के खतरे के चलते शहर के प्रमुख रमणीक व पर्यटन स्थल माने जाने वाले कायलाना के विकास और कायाकल्प करने की योजनाएं मूर्त रूप नहीं ले पा रही है। राज्य सरकार ने सात साल पहले जून 2013 में कायलाना के बड़ा भाखर वनखंड के करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र के हिस्से को 9.30 करोड़ की लागत से जैव विविधता पार्क विकसित करने के लिए वित्तिय स्वीकृति तक जारी कर दी थी । लेकिन परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में समूचा क्षेत्र वनभूमि होने का पता चलने और उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना की समस्या से परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया । इससे पहले भी जेडीए ने कायलाना विकास के प्रयास किए लेकिन एफसीए नियमों के कारण मामला अटका रहा।
ठंडे बस्ते में डालने के कारण
वर्ष 2012 में तत्कालीन जिला कलक्टर ने सर्वप्रथम कायलाना की पहाडयि़ों में 4 करोड़ 76 लाख सेग्रीन इॅको एनवायरमेंट परियोजना जोधपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम पूरी करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाया था । जिला प्रशासन व जेडीए की ओर से प्रस्तावित इस परियोजना में फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 ( एफसीए ) और उच्चतम न्यायालय के 12 दिसम्बर 1996 के आदेश की अवमानना की समस्या आने से परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
रोप-वे प्रोजेक्ट भी अटका
जेडीए की ओर से सिद्धनाथ से कायलाना होते हुए माचिया जैविक उद्यान तक रोप-वे प्रोजेक्ट भी पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने और एफसीए की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण फिलहाल एक साल से ठंडे बस्ते में है।
जगह बदली, अब 'नगर वन योजना
वन विभाग की 'नगर वन योजना के तहत कायलाना बड़ा भाखर वन क्षेत्र की 50 हेक्टर की पहाडिय़ों को हरा भरा कर जैव विविधता से परिपूर्ण वन विकसित करने की तैयारी की गई है। लेकिन इस योजना का स्थल कायलाना की जगह केरू रोड स्थित वन क्षेत्र होगा। करीब दो करोड़ की 'नगर वन परियोजना के लिए डीपीआर भारत सरकार से मंजूरी के लिए भेजी गई है।
Published on:
12 Feb 2021 11:30 pm
