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6 माह में 2 और पिछले तीन दिन में 10 मरीजों की हुई टेलीमेडिसिन

फलोदी. प्रदेश में शुरू की गई टेलीमेडिसिन योजना फलोदी में अपेक्षाओं की अनुरूप पिछड़ती हुई नजर आ रही है।

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फलोदी में टेलीमेडिसिन से उपचार करते हुए


टेलीमेडिसिन से विशेषज्ञों की सेवाएं देने में अपेक्षानुरूप पिछड़ा अस्पताल
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
फलोदी. सूचना प्रोद्योगिकी का चिकित्सा क्षेत्र में समावेश कर प्रदेश में शुरू की गई टेलीमेडिसिन योजना फलोदी में अपेक्षाओं की अनुरूप पिछड़ती हुई नजर आ रही है। दरअसल अस्पताल में आने वाले गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की चिकित्सा सेवाएं दिलाने के लिए शुरू की गई टेलीमेडिसिन योजना फलोदी के राजकीय चिकित्सालय में दिसम्बर 2017 में शुरू कर दी गई थी, लेकिन 6 माह में मात्र 2 मरीजों का ही टेलीमेडीशिन से उपचार करवाया गया। अगर पिछले तीन दिन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 23 से 25 मई तक 10 मरीजों का टेलीमेडिसिन करवाया गया। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि यहां मरीजों की इस सुविधा की आवश्कता तो जरूर है।
एैसे होता है उपचार-
फलोदी के राजकीय चिकित्सालय में टेलीमेडिसिन कक्ष स्थापित किया गया है। जहां कम्प्यूटर, वैब कैमरा, एक्सरे स्केनर, ईसीजी, डर्माेस्कोप, प्रिंटर और स्केनर आदि उपकरण उपलब्ध करवाए गए है। अस्पताल में आने वाले गंभीर बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार करवाने के लिए मरीज को कक्ष में लेजाकर वैब कैमरे के सामने बिठाया जाता है और वहां नियुक्त ऑपरेटर टेलीमेडिसिन की वेबसाइट पर लाग इन कर मरीज की पूरी जानकारी अपलोड करते है। इसके बाद मरीज की बीमारी का जानकारी दर्ज करने के बाद टेलीमेडिसिन के विशेषज्ञ चिकित्सक ऑनलाइन परामर्श देते हैं। टेलीमेडिसिन से परामर्श के लिए सप्ताह के अलग-अलग दिनों में के अनुसार मरीज को बुलाया जाता है।(निसं)
उदासीनता या तकनीकी खामी-
अस्पताल में टेलीमेडिसिन शुरू किए हुए करीब 6 माह हो गए है और अब तक मात्र 12 मरीजों की ही टेलीमेडिसिन करवाई गई है। जिनमें से 10 टेलीमेडिसिन तो गत 3 तीनों में हुई और 6 माह में मात्र 2 मरीज ही लाभान्वित हुए है। एैसे में टेलीमेडिसिन के कम आंकड़ों पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इसमें मरीज को परामर्श दिलाने में समय ज्यादा लगता है तथा कई डॉक्टर ऑनलाइन आने में देरी हो जाती है। साथ ही कई बार तकनीकी समस्याएं आ जाती है। (निसं)
इनका कहना है-
टेलीमेडिसिन के दौरान एक चिकित्सक की उपस्थिति जरूरी है तथा इसमें एक मरीज के करीब आधा घण्टा लग जाता है। जिससे ओपीडी में मरीजों को परेशानी होती है। अस्पताल प्रशासन द्वारा टेलीमेडिसिन से अधिकतम मरीजों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. रविन्द्र परमार, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, राजकीय चिकित्सालय, फलोदी