आखिर 18 को खुल जाएगा 18 करोड़ की संपदा पर लगा ताला

- पत्रिका की खबर के बाद जागे जिम्मेदार

By: Jay Kumar

Updated: 13 Oct 2021, 12:50 AM IST

जोधपुर. महात्मा गांधी अस्पताल की ओलम्पिक रोड पर नवनिर्मित ओपीडी और इमरजेंसी ब्लॉक आखिर 18 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। डॉ. सम्पूर्णानंद आयुर्विज्ञान महाविद्यालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। नए आउटडोर व आपातकालीन ब्लॉक में मेडिसिन व सर्जरी विभाग के आउटडोर व आपातकालीन सेवाएं शुरू की जाएगी, लेकिन आर्थोपेडिक्स आउटडोर इसमें शामिल नहीं होगा।

राजस्थान पत्रिका ने गत 4 अक्टूबर को लगभग 16 करोड़ की लागत से बनी नई इमारत में आउटडोर व आपातकालीन सेवाएं शुरू नहीं होने का मुद्दा 'तीसरी लहर के इंतजार में 16 करोड़ की संपदा पर तालाÓ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इसे लेकर जिला प्रशासन के जरिए रिपोर्ट तलब की। इसके बाद हरकत में आए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आनन-फानन में तैयारी शुरू की। पहले इसे 15 अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी हुई। बाद में 18 अक्टूबर से शुरू करने का फैसला हुआ। इस सम्बन्ध में महात्मा गांधी अस्पताल अधीक्षक राजश्री बेहरा ने मंगलवार को आदेश जारी कर संबंधित विभागाध्यक्षों, यूनिट हेड्स व चिकित्सा अधिकारी प्रभारी को उनके विभाग से सम्बन्धित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा है।

पुराने आउटडोर में डीएनए लैब
एमजीएच के पुराने आउटडोर भवन का उपयोग डीएनए लैब के लिए किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसके अनुरूप तैयारी भी की जा रही है। मौजूदा इमरजेंसी ब्लॉक के इस्तेमाल को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है कि इसका बेहतर उपयोग किस काम में हो सकता है।

एक हजार मरीजों को मिलेगी प्रतिदिन राहत
महात्मा गांधी अस्पताल में मेडिसिन, सर्जरी व ऑर्थोपेडिक मिलाकर तीन क्लिनिकल आउटडोर संचालित होते हैं। हालांकि ऑर्थोपेडिक आउटडोर नए ब्लॉक में नहीं लाया जा रहा। फिर भी नया ब्लॉक शुरू हो जाने से मरीजों व उनके परिजनों को मरीज दबाव के कारण छोटी पडऩे लगी मौजूदा ओपीडी की भीड़ से राहत मिल सकेगी। अभी एमजीएच आउटडोर में प्रतिदिन औसतन एक हजार मरीज पहुंचते हैं।

जरूरत पड़ी तो कोरोना ब्लॉक
मेडिकल कॉलेज प्रशासन कोरोना की संभावित तीसरी लहर के म²ेनजर ही नई ओपीडी शुरू नहीं कर रहा था, ताकि जरूरत पड़े तो इसमें लगे २५० बैड का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए किया जा सके। लेकिन कॉलेज सूत्रों का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर आती है तो नई ओपीडी को कोरोना डेडिकेटेड वार्ड के रूप में काम लेने का विकल्प खुला रखा गया है।

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