9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नारी हृदय के अनेक भावों को उजागर करने में सफल रहा नाटक ‘सौत

  प्रेमचंद रंग महोत्सव में 'कफनÓ का सफ ल मंचन, आज 'बूढ़ी काकीÓ मंचन से होगा महोत्सव का समापन
2 min read
Google source verification
नारी हृदय के अनेक भावों को उजागर करने में सफल रहा नाटक 'सौत

नारी हृदय के अनेक भावों को उजागर करने में सफल रहा नाटक 'सौत

जोधपुर. टाउन हॉल में प्रेमचंद रंग महोत्सव के दूसरे दिन नाट्यांश नाटकीय एवं प्रदर्शनीय कला संस्थान उदयपुर की ओर से दो लघु नाटकों 'सौतÓ एवं 'कफनÓ का सफल मंचन अमित श्रीमाली के सधे हुए निर्देशन में किया गया। मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानी 'सौतÓ नारी हृदय के अनेक भावों को सामने लाती है। स्वामित्व, अधिकार, ईष्र्या, जलन, दु:ख, गुस्सा, दया आदि भाव इस कहानी में उभरते दिखाई पड़ते हंै। महिला अपने में पूर्ण और स्वतंत्र है। यही बात मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी में दिखाई देती है। 'सौतÓ नाटक में रेखा सिसोदिया पहली पत्नी राजिया, आस्था नागदा सौत दासी और महेश कुमार जोशी पति रामू के अहम् किरदारों में नजर आए। अन्य चरित्रों में नेहा श्रीमाली, पियूष गुरुनानी ने अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह न्याय किया। आकांक्षा संस्थान के सचिव और समारोह के संयोजक डा. विकास कपूर ने दोनों नाटकों के निर्देशक अमित श्रीमाली को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

वास्तविकता और समाज के आडम्बर के बीच संघर्ष की कहानी 'कफनÓ
मध्यान्तर के बाद मंचित कहानी 'कफनÓ सामाजिक व्यवस्था की एक ऐसी कहानी है जो मेहनत के प्रति आदमी को हतोत्साहित करती है। क्योंकि उसे मेहनत की कोई सार्थकता दिखाई नहीं देती है। यह कहानी अत्यंत सुगठित एवं सुव्यवस्थित ढंग से मानव मनोवैज्ञानिक धरातल पर उकेरी गई है। कहानी की मूल संवेदना यह है कि आधुनिक आर्थिक विषमताएं बेरोजगारी और नाकारा समाज व्यवस्था के कारण व्यक्ति कितना स्वार्थी, कामचोर और जड़ हो सकता है। कहानी के मुख्य किरदार पिता और पुत्र अपने जीवन के प्रति इतने उदासीन हो जाते हैं कि दोनों अपनी मृतक पुत्रवधू और पत्नी के कफन के लिए एकत्र चन्दे को शराब पीने में व्यय कर डालते हैं और अन्त में अपने इस कुकृत्य का समर्थन करने के लिए समाज की रीति-रिवाज को कोसते हुए कहते हैं कि कैसा बुरा रिवाज है कि जिसे जीते जी तन ढकने को भले चीथड़ा न मिले उसे मरने पर कफ न चाहिए, वो भी नया। कहानी के माध्यम से वास्तविकता और समाज के आडम्बर के बीच का संघर्ष दिखाया गया है। नाटक में राघव गुर्जरगौड़ बाप घीसू, अगस्त्य हार्दिक नागदा बेटा माधव के किरदारों में बखूबी अभिनय किया। एक साथ दो नाटकों के मंचन के बाद भी कलाकारों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। सेतु सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी की नाट्य प्रस्तुति 'बूढ़ी काकीÓ का मंचन सलीम राजा के निर्देशन में किया जाएगा।

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग