
ROSEWOOD निर्यात पर लटक रही प्रतिबंध की तलवार
जोधपुर।
जोधपुर सहित देश से शीशम लकड़ी के उत्पादों के निर्यात को झटका लग सकता है। अन्तरराष्ट्रीय संस्था कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर्ड ऑफ वाइल्ड फाउना एण्ड फ्लोरा (साइटस) ने शीशम प्रजाति की लकड़ी को पूरी तरह से बैन करने की तैयारी कर ली है। 14 से 25 नवम्बर तक पनामा में होने वाली साइटस के 19वें कन्वेंशन में शीशम प्रजाति की लकड़ी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्णय हो सकता है। इससे जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग बुरी तहर प्रभावित हो सकता है। साइटस के भारत सहित विश्व के 184 देश सदस्य है। जोधपुर से फिलहाल करीब 1000-1200 करोड़ रुपयों के शीशम उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है।
वर्तमान में, साइटस ने शीशम को अपेन्डिक्स-2 रखा है। अब कई सदस्य देशों की राय पर साइटस पूरी शीशम प्रजाति को अपेन्डिक्स-1 की श्रेणी में लेने पर विचार कर रहा है। इस श्रेणी में आने से इस लकड़ी के व्यवसायिक गतिविधियों पर पूरी तक प्रतिबंध लग सकता है। वर्ष 2016 में शीशम लकडी की पूरी प्रजाति को खतरे में मानकर इसके व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी थी । बाद में, भारत ने साइटस परमिट के साथ निर्यात के लिए अनुमति ली थी ।
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केन्द्र सरकार भेज चुका रिपोर्ट
भारत सरकार के प्रतिनिधिमण्डल ने शीशम को देश में रोजगार का बडा जरिया बताते हुए इस लकड़ी पर लगी रोक हटाने की मांग की है । बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से साइटस को देश में शीशम की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। इस रिपोर्ट के अनुसार शीशम की लकडी भारत में विलुप्त होती प्रजाति नहीं है व भारत में यह खतरे से बाहर है ।
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10 प्रतिशत तक रह गया निर्यात
जोधपर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेष ने बताया कि साइटस की रोक के कारण शीशम से बने फर्नीचर निर्यात घटता जा रहा है, और अब करीब 10 प्रतिशत किया जा रहा है।
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प्रयास कर रहे है
इपीसीएच के महानिदेशक राकेशकुमार ने बताया कि इपीसीएच प्रतिनिधिमण्डल इस मीटिंग में शीशम को प्रतिबंध मुक्त करवाने के लिए जा रहा है। उम्मीद है, सफलता मिलेगी ।
Published on:
13 Nov 2022 10:28 pm
