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जोधपुर: कोरोना में सब चीजें दान कर रहे, मगर यह दान क्यों नहीं ?

jodhpur covid-19 - जोधपुर में देहदान और नेत्रदान बंद- डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज में एक साल से देहदान नहीं, एम्स में इस साल 9 देहदान- नेत्रदान केवल 2, कोविड से पहले हर साल होते थे 150 नेत्रदान
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कोरोना में इस दान पर लग गया ‘ताला’

कोरोना में इस दान पर लग गया ‘ताला’

जोधपुर. कोरोना में भामाशाहों ने हर चीज का खुलकर दान किया। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, बेड, दवाइयां, मेडिकल उपकरण, खाद्य सामग्री, रहने को कोविड सेंटर सहित कई वस्तुओं के ढेर लग गए, लेकिन कोरोना ने मानव अंग दान पर ताला लगा दिया। पिछले सवा साल से अंगदान बंद है। डॉ सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में हर साल औसतन 25 देहदान होते हैं लेकिन 15 मार्च 2020 के बाद एक भी देहदान नहीं हुआ। कुछ लोग अपने परिजनों की मृत देह लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे लेकिन संक्रमण के डर से देह स्वीकार नहीं की गई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर में कोविड की प्रथम लहर के बाद देहदान बंद हो गया। नवम्बर 2020 में प्रोटोकॉल की पालना करते हुए एम्स ने वापस देहदान शुरू कर दिया जो मार्च 2021 तक चलता। जनवरी से लेकर मार्च 2021 में एम्स में 9 देहदान हुए।

एसएनएमसी में 155, एम्स में 135 देहदान
- एसएनएमसी में 2021 में एक भी देहदान नहीं हुआ।
- 11 देहदान हुए एसएनएमसी में वर्ष 2020 में
- 25 देहदान हुए एसएनएमसी में वर्ष 2019 में
- 155 देहदान अब तक हो चुके हैं एसएनएमसी में
- 9 देहदान हुए एम्स में इस साल
- 6 देहदान हुए एम्स में पिछले साल
- 135 देहदान अब तक हो चुके हैं एम्स में

हर साल चाहिए 50 देहदान
जोधपुर में हर साल 50 देहदान की आवश्यकता है। एसएनएमसी में 25 और एम्स में 25 देहदान पर्याप्त है। एम्स में कई प्रकार की लाइव सर्जरी कॉन्फ्रैंस होती है। ऐसे में 8-10 बॉडी वहां भी उपयोग में आती है।

केवल 2 आंखें मिली, औसत है 150 का
कोरोना ने नेत्रदान को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। इस साल कोविड की दूसरी लहर शुरू होने से पहले अप्रेल के प्रथम सप्ताह में केवल 2 नेत्रदान हुए। पिछले साल कोविड के कारण जनवरी से मार्च 2020 तक 26 नेत्रदान हुए। इससे पहले के सालों में जोधपुर में नेत्रदान का औसत 150 रहता है। अब तक यहां 960 नेत्रदान हो चुका है।
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‘हमारे पास दो-तीन साल का स्टॉक है। ऐसे में दिक्कत नहीं आई। वैसे इस समय लाइव सर्जरी कॉन्फ्रैंस भी बंद है।’
- डॉ आशीष कुमार नैय्यर, एनाटोमी विभाग, एम्स जोधपुर
‘कुछ लोग बॉडी लेकर आए थे लेकिन कोविड संक्रमण के कारण हमनें बॉडी नहीं ली। कोविड खत्म होने के बाद वापस शुरू करेंगे।’
- डॉ सुषमा कटारिया, एचओडी, एनाटोमी विभाग, एसएनएमसी जोधपुर
‘नेत्रदान तो लगभग बंद ही हो गया। उम्मीद है कि कोविड खत्म होने के बाद पहले जैसी गति पकड़े।’
राजेंद्र जैन, अध्यक्ष (जोधपुर), राजस्थान आईबैंक सोसायटी

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