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विशेषज्ञों की सलाह के बाद संवारें टाउन हॉल : कोर्ट

-संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष ने कोर्ट को बताई बदहाली की तस्वीर
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विशेषज्ञों की सलाह के बाद संवारें टाउन हॉल : कोर्ट

विशेषज्ञों की सलाह के बाद संवारें टाउन हॉल : कोर्ट

जोधपुर.

राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने जयनारायण व्यास टाउन हॉल (Jayanarayan Vyas Town Hall) के पुनरुद्धार और मरम्मत के लिए राज्य सरकार को विशेषज्ञों की सलाह लेने को कहा है। कोर्ट ने इसके लिए एक कमेटी गठित करने की मंशा जताते हुए दिशा-निर्देश जारी करने के लिए सुनवाई गुरुवार को नियत की है।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिलकुमार गौड़ ने डीपीआर के आधार पर तैयार थ्री-डी नक्शे पेश किए।

इस दौरान राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने कोर्ट को बताया कि छह महीने पूर्व निर्देश देने के बावजूद कार्यकारी एजेंसी ने कोई सलाह मशविरा नहीं किया।

इसके चलते डीपीआर में कई कार्य शामिल नहीं किए गए। उन्होंने बताया कि हॉल के आंगन के स्लोप में अपेक्षित परिवर्तन की जरूरत है ताकि पीछे की कुर्सियों पर बैठे दर्शकों को मंच सहज नजर आए। पार्किंग के लिए भी कोई प्रस्ताव नहीं है।

आधुनिक साउंड सिस्टम पर फोकस नहीं किया गया और सबसे बड़ी चुनौती हॉल को साउंड प्रूफ करने की है, ताकि बाहर से ट्रेन चलने और वाहनों की आवाजाही की आवाज अंदर तक नहीं पहुंचे। न्याय मित्र डॉ. सचिन आचार्य ने भी कोर्ट के समक्ष कई उपयोगी सुझाव रखे।
खंडपीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि जिस तरीके से कार्य किया जाना प्रस्तावित है, उससे करोड़ों रुपए जाया होने की आशंका है। इस पर विशेषज्ञों के इनपुट के आधार पर रि-वर्क करने की जरूरत है। खंडपीठ गुरुवार को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश देगी।

क्या है मौजूदा योजनाराज्य सरकार ने टाउन हॉल के पुनरुद्धार और मरम्मत की मौजूदा योजना के लिए के लिए 4.50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। जिसका खर्च जोधपुर विकास प्राधिकरण और सरकार आधा-आधा वहन करेंगे। इसके तहत सिविल वर्क पर 88 लाख रुपए, प्लम्बिंग कार्य पर 6.38 लाख, इलेक्ट्रिक वर्क पर 48.81 लाख, फायर वर्क पर 57 लाख, इंटीरियर वर्क पर 1.06 करोड़ तथा साउंड एवं लाइटिंग सिस्टम पर 43 लाख रुपए का खर्च प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा एचवीएसी तथा सीसीटीवी कैमरे व अन्य सुविधाएं विकसित की जानी प्रस्तावित हैं।

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