जोधपुर। जिले के सरकारी बालिका स्कूलों में बेटियों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधा नहीं होने पर एक ओर राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने इसे गंभीर से लेते हुए स्वप्रेरणा से संज्ञान लिया है। वहीं दूसरी ओर स्कूल में पढ़ने वाली बेटियों ने स्कूल के गंदे शौचालय को लेकर अपनी पीड़ा जताई है।
घर आने तक रोक कर रखते है
9वीं कक्षा की छात्रा शेफाली भाटी ने बताया कि स्कूल में शौचालयों की स्थिति खराब होने से परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार तो ऐसी स्थिति होती है कि घर आने तक खुद को रखकर रखना पड़ता है। स्कूल में बने शौचालयों की समय पर सफाई नहीं होने से वे इतने गंदे पड़े है कि उनका उपयोग करने की हिम्मत ही नहीं होती।
नल टूटे होने से पानी की समस्या
छठी कक्षा में पढ़ने वाली प्रेरणा ने बताया कि स्कूल में करीब छह सौ से अधिक विद्यार्थी है। विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप स्कूल में शौचालय की संख्या कम है। जिससे वे गंदे पड़े है। इसकी एक वजह शौचालय में लगे नल टूटे होना से उनमें पानी नहीं आना है। जिसकी वजह से उनकी सफाई नहीं हो पाती और हमें ऐसे गंदे शौचालयों का उपयोग करना पड़ता है।
बंद नहीं होते दरवाजे
8वीं कक्षा की जाह्नवी का कहना है कि शौचालयों के क्षतिग्रस्त होने से दरवाजे ठीक से बंद नहीं हो पाते। ऐसे में कई बार साथ चलने वाला कोई नहीं होने से ज्यादा परेशानी होती है और उस वजह से कई बार पेट में दर्द भी होने लगता है। जिससे पढ़ाई में मन नहीं लगता ओर जल्द घर जाने की लगी रहती है।
गंदे शौचालयों में आती है बदबू
7वीं कक्षा की वंदना कहती है कि स्कूल में सफाईकर्मी नहीं होने से शौचालयों की सफाई नहीं हो पाती। जिससे गंदे पड़े शौचलयों से बदबू आती है। कई बार तो उनमें जाने के दौरान तबियत तक खराब हो जाती है। वहीं क्षतिग्रस्त शौचलयों में जाने से पहले किसी न किसी को साथ ले जाना पड़ता है। जिससे वहां एक दूसरे का इंतजार करने के दौरान गंदी बदबू को झेलना पड़ता है।