
राजस्थान के इस शहर में अब दो सरकारें, नेताओं की पंचायती भी बढ़ेगी
जोधपुर.
सूर्यनगरी में दो शहरी सरकारों का खाका खिंच गया है। नगर निगम की सीमा उत्तर-दक्षिण में बंट चुकी है। अब सभी की नजरें वार्ड आरक्षण लॉटरी पर है। दो निगम बनने के बाद भी सीमा नहीं बढऩा सभी को खल रहा है। लेकिन जो बदलाव होगा वह साफ नजर आ रहा है। एक तो शहर में नेताओं की संख्या बढ़ेगी। महिला नेतृत्व में अब तक का सर्वाधिक होगा। वार्ड की सीमा छोटी होने से विकास का दायरा बढऩे की उम्मीद है।
दो निगम होने से आने वाले बदलाव पर विस्तृत रिपोर्ट -
नगर निगम चुनाव में अब तक उतनी ही महिलाओं को चुनाव में उतारा जाता था जितने वार्ड आरक्षित होते थे। इस बार दोनों निगम में महापौर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है। ऐसे में महिलाओं के लिए आरक्षित एक तिहाई वार्ड के अलावा अन्य वार्डों से भी महिला उम्मीदवारों को चुनावों में उतारा जा सकता है। पिछले बोर्ड के कार्यकाल में एक वार्ड पर करीब 2 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए गए। इसी औसत से अगले पांच साल भी बजट आवंटित हुआ तो शहरी विकास के लिए मिलने वाली राशि भी करीब तीन गुना होगी।
ये होंगे तीन बड़े बदलाव
1. नेताओं की संख्या बढ़ेगी
वर्ष 2014 के निगम चुनावों में 65 वार्ड में 261 प्रत्याशी मैदान में थे। इससे पहले वर्ष 2009 के चुनावों में 394 प्रत्याशी मैदान में थे। इस बार 160 वार्ड है जो कि करीब ढाई गुना है। ऐसे इस बार चुनाव लडऩे वाले नेताओं की संख्या भी करीब 600 से 1 हजार के बीच रह सकती है। यदि ऐसा होता है तो जनता के काम भी आसानी से होने चाहिए।
2. महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा - नगर निगम उत्तर व दक्षिण दोनों में महापौर पद महिला के लिए आरक्षित हो चुके हैं। 80-80 वार्ड के दो निगम में 26-26 से अधिक महिलाओं के लिए आरक्षण हो सकता है। लेकिन इस बार आरक्षित वार्डों के अलावा भी महिला नेतृत्व देखने को मिल सकता है। पिछले बोर्ड में 65 में से 22 वार्ड महिला के लिए आरक्षित थे और महिला वार्ड 23 थी। लेकिन दोनो ही पार्टियों ने महिलाओं को आरक्षित वार्ड के इत्तर मैदान में नहीं उतारा था।
3. शहरी विकास का बजट भी ढाई गुणा - शहरी विकास के लिए पिछले बोर्ड में प्रत्येक वार्ड के लिए औसत 2 करोड़ की राशि दी गई खर्च की गई थी। इस लिहाज से वार्डवार बजट का आंकड़ा करीब 125 करोड़ था। इस बार वार्ड की सीमा कम हुई है। पिछले बार जहां औसत एक वार्ड में 14 से 15 हजार की जनसंख्या थी तो इस बार 160 वार्ड होने से औसतन 6 हजार की जनसंख्या ही एक वार्ड में होगी। ऐसे में कम जनसंख्या में यदि प्रत्येक वार्ड में यह बजट मिलता है तो शहरी विकास की तस्वीर बदलनी चाहिए।
क्या कहते हैं पूर्व महापौर
हमने प्रत्येक वार्ड पर 2 करोड़ से अधिक राशि खर्च की है। पहले तो निगम की सीमाएं बढ़ानी थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। निगम में संसाधन बढ़ाने होंगे, स्टाफ भी बढ़ाना होगा। अब एक वार्ड में इसी लिहाज से बजट आवंटित होता है तो विकास भी अच्छा होगा।
- घनश्याम ओझा, पूर्व महापौर जोधपुर।
Updated on:
08 Jan 2020 08:51 pm
Published on:
08 Jan 2020 08:51 pm
