शहर के प्राचीन जलस्रोत जनता और प्रशासन की लापरवाही की वजह से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं।
पानी सूं प्रलय मचै बिन पानी दुष्काल
पानी रे प्रकोप री कर तू सार सम्भाल
शहर के प्राचीन जलस्रोत जनता और प्रशासन की लापरवाही की वजह से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। इन पारंपरिक जलस्रोतों में पानी की आवक वाले रास्तों को अतिक्रमण मुक्त कर साफ किया जाए, ताकि जल संग्रहण ज्यादा से ज्यादा हो सके और आम जन को पेयजल का अभाव न झेलना पड़े।
यह कहना है जल संरक्षण कार्य के समाजसेवी जसवंतसिंह का। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान सूरसागर के पास स्थित खानों में लाखों गैलन पानी इक_ा होता है, वह चैनल के जरिये पास स्थित हाथी नहर से मुख्य पेयजल संग्रहण कर कायलाना में डाला जाए, ताकि शहर के पास के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ ही वन्य जीवों को पानी उपलब्ध हो सके। लोकायुक्त के आदेश देने के बावजूद पेयजल स्रोत उम्मेदसागर को अतिक्रमण मुक्त न करना दुखद है।