
मानसून की पुरवाई से घबराया पाक, यूएनओ ने दी चेतावनी
जोधपुर. चरमपंथियों की तरह टिड्डी को भारत की सीमा के पास पालकर भारत भेजने वाले पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की एक चेतावनी ने चिंता की लकीरें खींच दी है। यूएनओ के मुताबिक मानसूनी हवा की दिशा बदलते ही टिड्डी हवा के साथ वापस पाकिस्तान में दाखिल हो सकती है। विशेषकर पाक के थारपारकर, नारा व चोलिस्ताान रेगिस्तान में टिड्डी दुबारा आकर अंडे दे सकती है। इससे पाक की खरीफ की फसल को खतरा होगा। मानसून की दिशा दक्षिण-पश्चिमी से उत्तर-पूर्व रहती है लेकिन राजस्थान में बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा से बरसात अधिक होने की वजह से हवा पूर्व से पश्चिमी की ओर भी चलती है, जिसे मानसून की पुरवाई करते हैं। मानसून की पुरवाई की तीव्रता अधिक हुई तो टिड्डी बिहार से उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान होते हुए वापस पाक में घुस सकती है।
निश्चित रुट पर चलती है टिड्डी
दरअसल टिड्डी का एक विशेष रुट है और वह उसी रुट पर मौसम के अनुसार आगे बढ़ती है। सर्दियों में टिड्डी अफ्रीका के पश्चिमी देशों और लाल सागर के दोनों और बसे देशों में प्रवसन करती है। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही टिड्डी अफ्रीका के पश्चिमी से पूर्व व उत्तर दिशा में बसे देशों में जाती है वहीं खाड़ी देशों से यह ईरान, पाकिस्तान होते हुए भारत तक आती है। भारत से आगे सामान्यत टिड्डी नहीं जाती है, हालांकि इस साल नेपाल भी पहुंच गई।
पाक ने टिड्डी पाली, नवम्बर की बजाय फरवरी में गई टिड्डी
भारत-पाक में २६ साल बाद वर्ष २०१९ में टिड्डी का हमला हुआ था। पिछले साल पाकिस्तान ने सिंध व पंजाब प्रांत में स्थित मरुस्थल में टिड्डी के अण्डों और हॉपर को खत्म करने की बजाय प्रश्रय दिया था ताकि वे अपने प्राकृतिक रुट के अनुसार भारत की तरफ बढ़े और वहां वनस्पति को नुकसान पहुंचाए। यही कारण रहा कि २०१९ में टिड्डी सर्दियों की शुरुआत यानी नवम्बर में लौटने की बजाय फरवरी २०२० तक आती रही। इससे भारत की रबी की फसल को नुकसान हुआ। राजस्थान में एक हजार करोड़ का खराबा हुआ था।
Published on:
06 Jul 2020 12:33 pm
