scriptUse of substandard stone in dam project | करोड़ों के इस बांध प्रोजेक्ट में हो रहा घटिया पत्थर का उपयोग | Patrika News

करोड़ों के इस बांध प्रोजेक्ट में हो रहा घटिया पत्थर का उपयोग

क्षेत्र के छीतर की पहाडि़याें में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन चेक डेमों में गुणवत्ता मानकों को अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री के साथ चेक डेम का निर्माण करवाए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।

जोधपुर

Updated: June 14, 2022 10:10:33 am

चेक डेम के निर्माण में घटिया पत्थर से बन रही दीवार
बेलवा (जोधपुर) . क्षेत्र के छीतर की पहाडि़याें में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन चेक डेमों में गुणवत्ता मानकों को अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री के साथ चेक डेम का निर्माण करवाए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
करोड़ों के इस बांध प्रोजेक्ट में हो रहा घटिया पत्थर का उपयोग
बेलवा. क्षेत्र के छीतर की पहाड़ियों में घटिया पत्थर से निर्माणाधीन चेक डेम
ग्रामीणों का कहना है कि बस्तवा के गोतावर मंदिर से मेरिया जाने वाले सड़क मार्ग के पास निर्माणाधीन चेक डेम संख्या 46 की दीवार निर्माण में सबसे घटिया किस्म के बजरी युक्त पत्थर का उपयोग किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद फिलहाल काम रुकवाया गया है।

गोतावर विकास समिति अध्यक्ष गायड़सिंह बस्तवा ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की महत्वांकाक्षी पेयजल संरक्षण परियोजना के निर्माण कार्यों में धड़ल्ले से मानकों को अनदेखी करके कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले बस्तवा सुंडा गांव की पहाड़ियों में भी बन रहे डेम की कार्य क्वालिटी को लेकर ग्रामीणों द्वारा विरोध दर्ज कराने के साथ ही कार्य रुकवाया था, लेकिन अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्यवाही के अभाव में कुछ दिन बाद कार्य शुरू हो गया।
बांध निर्माण में गोतावर विकास समिति व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कार्य की क्वालिटी को लेकर सवाल उठाए थे। जिसमें उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त पत्त्थर, सीमेंट की मात्रा, तराई सहित कई अनियमितताओं को लेकर वाप्कोस के इंजीनियर्स के साथ ही कंपनी के ठेकेदार को भी अवगत करवाया था।

बजरी युक्त पत्थर का उपयोग
ग्रामीणों का कहना है कि चेक डेम निर्माण करने वाली कंपनी को पत्थर के लिए अधिक लागत नहीं आए, इसलिए वे डेम वाले स्थान से ही पत्थर को उपयोग में ले रहे हैं। ऐसे में वे पहाड़ की ऊपरी परत को भी छोटे छोटे टुकडे़ करके दीवार में प्रयुक्त कर रहे हैं। पहाड़ी के ऊपरी कमजोर पत्थर निर्माण में बड़ी चूक साबित हो सकते हैं।

घटिया निर्माण कहीं बन न जाए आफत
ग्रामीणों का कहना है कि छीतर की पहाडि़यों में करीब पचास छोटे छोटे बांध निर्माणाधीन हैं। करोडों की लागत से बन रहे डेमों में प्रत्येक चेक डेम पर पचास से सत्तर लाख रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता को लेकर निर्धारित मानकों पर कार्य नहीं हो रहे है।
बांध निर्माण वाले स्थान से ही पहाड़ के पत्थर को काट कर बिना गुणवत्ता देखे आनन फानन में दीवार खडी कर रहे हैं, जो आने वाले बरसों में खतरनाक साबित हो सकती है। वहीं दीवार निर्माण के दौरान नियमित पानी से तराई नहीं होने से भी सीमेंट की मजबूती से पकड़ नहीं हो पा रही है।

इनका कहना है
घटिया निर्माण के चलते पूर्व में भी डेम निर्माण कार्य रुकवाए थे। बस्तवा व सुजाननगर सड़क मार्ग के पास बन रहे चेक डेम में भी निर्माण में अनियमितताओं को लेकर वाप्कोस के उच्च अधिकारियों से आवश्यक जांच करवाने की मांग करेंगे।
गायड़सिंह इन्दा, अध्यक्ष, गोतावर विकास समिति

निर्माण कार्य रुकवाया है

क्षेत्र के डेम संख्या 46 जो सुजाननगर मार्ग के पास निर्माणाधीन है, उसमें अनियमितताओं को लेकर प्रकरण मेरे संज्ञान में है। संबंधित कार्यस्थल पर पिछले दो दिन से कार्य रूकवाया हुआ है। इसमें पत्थर की क्वालिटी सहित अन्य तीन चार मानकों पर कार्य में कोताही बरती गई है। संबंधित ठेकेदार को गुणवत्ता युक्त् कार्य के लिए पाबंद किया जाएगा। अन्य निर्माण कार्यों में भी मानकों पर कार्य हो ,इसके लिए टीम के साथ देखरेख में लगे हुए है।
किशोर कुमार टाक, चीफ इंजीनियर, वाप्कोस

बस्तवा के चेक डेम में अनियमितता को लेकर मामला मेरे संज्ञान में आया है। पूर्व में भी ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर आकर ठेकेदार व इंजीनियर्स को हिदायत दी थी।प्रोजेक्ट का कार्य अच्छी गुणवत्ता पूर्ण हो, यही मंशा है। प्रोजेक्ट इंचार्ज को निर्देशित करके कार्य मानकों में कमी पाए जाने पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
मनोज नागर, जनरल मैनेजर वाप्कोस

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