
अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत सहित अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाए जाने के बाद शुरुआती झटके के बाद लॉन्ग टर्म फायदा भी नजर आने लगा है। अमरीका खुद हैंडीक्राट या फर्नीचर निर्माण नहीं करता, इसका कारण यहां की लेबर कॉस्ट ज्यादा है। ऐसे में वह काफी हद तक भारत, चीन और वियतनाम पर भी निर्भर है। वियतनाम ने मास्टर कार्ड खेलते हुए टैरिफ को शून्य कर दिया है, ऐसे में अमरीका भी उसे राहत दे सकता है।
जोधपुर सहित पूरे राजस्थान से चार हजार करोड़ का वार्षिक निर्यात अमरीका में होता है, लेकिन यह अमरीका की जरूरत का बहुत कम हिस्सा है। भारत से कई गुणा ज्यादा फर्नीचर अमरीका में चीन व वियतनाम से जाता है। भारत पर 26 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत और वियतनाम पर 46 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। हालांकि वियतनाम ने अमरीका इपोर्ट पर राहत देकर नए समीकरण खड़े कर दिए हैं। ऐसे में एक उम्मीद यह जगी कि अमरीका में फर्नीचर भले ही महंगा होगा, लेकिन तीनों देशों की तुलना में भारत को राहत मिलेगी।
अभी तत्कालीन नुकसान सभी के सामने आ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका आने वाले समय में फायदा मिलेगा। निर्यातक अजय शर्मा बताते हैं कि अभी जो तत्कालीन नुकसान दिख रहा है। उसका आने वाले समय में फायदा होगा। क्योंकि अमरीका का मुख्य टैरिफ झगड़ा चीन से है। निर्यातक अशोक चौहान ने बताया कि अभी चालू ऑर्डर पर ही अमरीका से डिस्काउंट मांगा जा रहा है। आने वाले समय में कई चुनौतियां आएगी।
वियतनाम ने इस पूरे प्रकरण में मास्टर कार्ड खेल दिया गया है। अमरीका ने जैसे ही रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया तो वियतनाम ने अमरीकी प्रोडक्ट पर लगने वाले टैक्स को जीरो कर दिया है। अब अमरीका भी यह राहत दे सकता है। वियतनाम फर्नीचर मार्केट में उभरता हुआ नाम है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा में जा सकता है।
अमरीकी ग्राहक रास्ते में जा रहे माल एवं रेडी टु शिप कंटेनर पर डिस्काउंट मांग रहे हैं। अमरीका ने भारत पर 26 प्रतिशत शुल्क और वियतनाम की शून्य शुल्क नीति ने जोधपुर के हैंडीक्राट फर्नीचर निर्यात क्षेत्र को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया है। सरकार से तुरंत कूटनीतिक पहल, निर्यात प्रोत्साहन और राहत पैकेज की आवश्यकता है। ताकि यह पारंपरिक उद्योग टिकाऊ रह सके।
भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैंडीक्राटस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
अभी टैरिफ में जो कुछ चल रहा है उससे काफी अनिश्चितता है, लेकिन लॉन्ग टर्म फायदा हो सकता है। सरकार भी इसमें पहल कर सकती है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि भारत सरकार भी राहत पैकेज जारी करेगी।
हंसराज बाहेती, सीओए सदस्य, ईपीसीएच
Published on:
06 Apr 2025 03:08 pm

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