
गीले कचरे का निस्तारण करने की प्रक्रिया शुरू, बायो-कम्पोस्टिंग से 80 प्रतिशत गला देंगे कचरा
अविनाश केवलिया/जोधपुर. शहर से जमा होने वाला कचरा पिछले पांच साल से बिजली बनाने का इंतजार कर रहा है। लेकिन वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट है जो कि धरातल पर आने का नाम ही नहीं ले रहा। कभी राज्य सरकार के साथ तकरार तो कभी बिजली खरीद की दरें। ऐसे कुछ कारण है जो वेस्ट टू एनर्जी पर काम करने वाली फर्म ने प्रोजेक्ट ही शुरू नहीं किया। अब कचरे को ढेर का निस्तारण करने के लिए नगर निगम ने बायो-कैमिकल कम्पोस्टिंग तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया है। केरू में वेट वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर दी है।
जोधपुर शहर से प्रतिदिन 600 टन कचरा संग्रहित किया जाता है। इसमें वेट वेस्ट करीब 30 से 40 प्रतिशत तक होता है। इससे पहले कचरा निस्तारण के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट से आस थी। जिसमें कचरे से बिजली बनाना प्रस्तावित था। कई सालों तक इस प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा सका। ऐसे में अब कचरा निस्तारण के लिए कैमिकल कम्पोस्टिंग तकनीक का उपयोग लेना शुरू कर दिया गया है। पहली बार इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वेट वेस्ट पर इस बायो-कैमिकल प्रोडक्ट का छिडक़ाव किया जाएगा। इसके बाद यह कचरे को गलाकर 80 प्रतिशत तक कम कर दिया जाएगा।
प्रोसेसिंग साइट शुरू
केरू में वेट वेस्ट के लिए प्रोसेसिंग साइट शुरू कर दी गई है। इसमें कचरे के ढेर पर इस कैमिकल प्रोडक्ट का छिडक़ाव किया जाएगा। जो कि 15 दिन में कचरे को गलाकर खाद में परिवर्तित कर देगा।
गर्मी में भी जीवित रहेगा
इस कम्पोस्टिंग प्रोडक्ट में रसायन 70 डिग्री तक तापमान सहन करने में सक्षम है। ऐसे में गर्मी के दिनों में जब जोधपुर में तापमान 45 डिग्री को पार कर जाता है तब भी यह कम्पोस्टिंग प्रक्रिया जारी रहेगी। जबकि केचुएं से कम्पोस्टिंग 40 डिग्री सेल्सियस के बाद बंद हो जाती है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में फायदेमंद
वेट वेस्ट कम्पोस्टिंग प्रक्रिया शुरू करने से स्वच्छता सर्वे में 150 नम्बर का सीधा फायदा होगा। अभी कचरा निस्तारण में 500 नंबर का नुकसान हो रहा था।
इनका कहना...
वेट वेस्ट प्रक्रिया को केरू डम्पिंग साइट पर सेंट्रलाइज तरीके से शुरू कर दिया गया है। वेस्ट टू एनर्जी में कुछ देरी हुई तो यह बायो-कैमिकल कम्पोस्टिंग तकनीक अपना रहे हैं।
- सचिन मौर्य, हेल्थ ऑफिसर, नगर निगम जोधपुर
Published on:
24 Dec 2019 11:30 am
