
विपत्ती के समय बदल जाए वह कैसा धर्म!
जोधपुर
टाउन हॉल में चल रहे ओमशिवपुरी नाट्य समारोह के तहत बुधवार शाम ‘चेहरे ’ का मंचन किया गया।
लेखक शंकर शेष लिखित और जयपुर के रामसहाय पारीक के सटीक निर्देशन में प्रस्तुत नाटक का कथानक इस प्रकार है कि तेज बरसात में एक गांव के बाहर श्मशान के पास खंडहर में गांव के समाज सेवी भैरोसिंह के पार्थिव शरीर को लेकर रवाना हुई शवयात्रा में शामिल गणमान्य लोग शरण लेते हैं।
खंडहर में पहले से ही गांव से गहने लेकर मुंबई में हीरोइन बनने का ख्वाब लिए एक युवती भी मौजूद है जो एक लफंगे के साथ भागी थी। वहीं पर कपडे व भोजन का टोकरा लिए एक पिता भी आ जाता है जो पडोसी गांव में अपनी बेटी के ससुराल उसकी डिलिवरी पर देने के लिए जा रहा है।
इन सभी की मौजूदगी से घटना क्रम इस प्रकार बनता है कि कभी भजन कीर्तन होते हैं तो कभी शोक सभा, कभी शवयात्रा के साथ आए युवा समय काटने के लिए अंताक्षरी करने लगते हैं तो अंत में लफंगे की पोल खुलने पर पंचायत बैठा ली जाती है। पंचों द्वारा आरोपियों से सवाल जवाब के चक्कर में खुद पंच भी सवालों के घेरों में आ जाते हैं और उतरने लगते हैं चेहरों से नकाब।
लफंगे विनोद (अवनीश दूबे), भागी हुई लडक़ी कमली (यूथिका नागर), भवानी (सुरेश मोहन), पंडित राजीव (अंकित), परमानंद (सुरेन्द्र माथुर), सुखलाल (देवसागर) व साहू (राजीव जैन) के साथ धनेश वर्मा, विजय मिश्र-दानिश, संदीप शर्मा, प्रणव महाजन, नमन पारीक, कुशलेश शर्मा, दिलिप सिंह नारूका व अध्यापिका के किरदार में चंचल शर्मा ने उपस्थिति दर्ज कराई।
नाटक का सबसे अहम पक्ष ध्वनि प्रभाव था। आरंभ में अकादमी सचिव महेश पंवार ने नाटक के निदेशक का स्वागत किया व स्मृति चिन्ह भेंट किया।
आज नाटक ‘रैगिंग’ का प्रदर्शन
समारोह में गुरुवार शाम साढ़े सात बजे जोधपुर के निर्देशक प्रमोद वैष्णव का नाटक ‘रैगिंग’ का प्रदर्शन होगा।
Published on:
18 Oct 2018 01:33 am
