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डेढ़ माह से काम बंद है तो एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने क्या कदम उठाए

-एयरपोर्ट विस्तार के प्रति उदासीन रवैये पर हाईकोर्ट नाराज - एएआइ के कार्यकारी निदेशक व संवेदक तलब
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डेढ़ माह से काम बंद है तो एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने क्या कदम उठाए

डेढ़ माह से काम बंद है तो एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने क्या कदम उठाए

जोधपुर.

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर एयरपोर्ट पर न्यू एप्रन और लिंक टैक्सी प्रोजेक्ट के कार्य में तय समय सीमा की अनदेखी और डेढ़ महीने से काम ठप होने पर कड़ा रुख अपनाया है।

कोर्ट ने एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) के कार्यकारी निदेशक और संवेदक पीवीआर प्रोजेक्ट्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के डायरेक्टर आनंद गर्ग को 4 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और तय समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होने के कारण बताते हुए अतिरिक्त शपथ पत्र पेश करने को कहा है।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में लिब्रा इंडिया की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एएआइ की ओर से बताया गया कि एयरपोर्ट पर सुविधाओं के विस्तार का कार्य कर रहे संवेदक पीवीआर लिमिटेड ने वित्तीय स्थिति का हवाला देकर डेढ़ महीने से काम बंद कर रखा है।

एएआइ ने पूर्व में कोर्ट में बताया था कि एयरपोर्ट पर सुविधाओं के विस्तार के सभी कार्य 30 अक्टूबर तक पूरे कर लिए जाएंगे। एएआइ के अधिवक्ता के यह बताने पर कि अब तक केवल 81 प्रतिशत काम ही पूरे हुए हैं, कोर्ट ने नाराजगी प्रकट की।

कोर्ट में एयरपोर्ट के निदेशक जीके खरे ने मौखिक रूप से निर्माण कार्य प्रभावित होने का ब्यौरा बताया और कहा कि मौजूदा संवेदक का अनुबंध निरस्त करने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जा चुका है।

यदि अनुबंध निरस्त किया जाता है और नए संवेदक के लिए निविदा आमंत्रित की जाती है तो ज्यादा वक्त लग सकता है। इस पर कोर्ट ने एएआई के कार्यकारी निदेशक व संवेदक कंपनी के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।

भूमि अवाप्ति का मुआवजा बाकी

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील बेनीवाल ने कोर्ट को बताया कि एयरफोर्स स्टेशन को दी जाने वाली करीब 5 बीघा भूमि की अवाप्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

खातेदारों को मुआवजा राशि देने के लिए रक्षा संपदा अधिकारी को सूचित कर दिया गया है। केंद्र की ओर से अधिवक्ता बीपी बोहरा ने बताया कि दो सप्ताह में मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद भूमि एयरफोर्स को हस्तांतरित की जा सकेगी।


सीआइएसएफ की ओर से पेश शपथपत्र में कहा गया कि विमान सेवाओं में बढ़ोतरी होने पर सीआइएसएफ को टर्मिनल स्ट्रेंथ बढ़ानी पड़ेगी और इसमें कोई दुविधा नहीं है। कोर्ट ने विमान सेवा प्रदात्ता कंपनियों को ज्यादा सेवाओं की संभावनाएं तलाशने को भी कहा है।

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