दुनिया में बढ़ रही ईसब की मांग, कोविड काल में भी निर्यात जारी

- प्रतिमाह निर्यात हो रहे 200 कंटेनर

- 80 प्रतिशत उत्पादन राजस्थान में

By: Amit Dave

Published: 09 Jun 2021, 05:35 PM IST

जोधपुर।

जहां कोविड-19 के कारण देश-विदेश के बाजारों में पूरा लॉकडाउन था, वहीं इन विपरीत परिस्थितियों में भी ईसब की भूसी की विदेशों में भारी डिमाण्ड़ रही, इसी का नतीजा है कि प्रतिमाह लगभग 180 से 200 कंटेनर का निर्यात हो रहा है। व्यापारियों व ईसब निर्यातकों के अनुसार ईसब के उत्पादन की कमी के कारण डिमाण्ड एण्ड सप्लाई पर बाजार चलेगा। इस बार ईसब के अच्छे भाव मिलने के कारण मारवाड़ के किसानों ने माल मंडियों में लाकर बेच दिया गया है। आगे डिमाण्ड एण्ड सप्लाई को देखते हुए इसब की अच्छी बढ़त देखने को मिलेगी।

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80 प्रतिशत उत्पादन राजस्थान में

ईसब का उत्पादन देश में करीब 80 प्रतिशत राजस्थान में होता है, शेष 20 प्रतिशत गुजरात और मध्य प्रदेश में होता है। ईसबगोल की खेती बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर जिलों व आसपास के गांवों में प्रमुखता से होती है। इस बार उत्पादन के समय राजस्थान में ईसब के बिजाई का क्षेत्रफ ल कृषि विभाग व स्थानीय व्यापारियों ने पिछले वर्ष की तुलना में सवा गुणा बताया था लेकिन उत्पादन के समय जैसलमेर-बीकानेर जिले में मार्च माह में आए भयंकर तुफ ान के कारण फ सल कमजोर आई।

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भूसी होती है निर्यात

प्रोसेसिंग के दौरान सबसे पहले ईसब सीड की क्लिनिंग की जाती है। बाद में, सीड का सोरटैक्स व ग्राइंडिंग की जाती है, जिससे भूसी निकलती है। इसके बाद भूसी की क्लिीनिंग की जाती है। इसके बाद पैकिंग व घरेलू मार्केट सहित विदेशों में निर्यात किया जता है।

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ईसबगोल

- 200 करोड़ का निर्यात होता है हर साल

- 80 फीसदी उत्पादन होता है राजस्थान में, शेष गुजरात व मध्यप्रदेश में

- 8 किलो प्रति हेक्टयर में होता है उत्पादन

- 10 से ज्यादा रोगों में है फायदेमंद

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कोविड काल में भी विदेशों में ईसब की अच्छी डिमाण्ड है। हर माह 180-200 कंटेनर निर्यात हो रहे है। आगे भी ईसब के अच्छे कारोबार की उम्मीद है।

पुरुषोत्तम मूंदड़ा, अध्यक्ष

जीरा मंडी व्यापार संघ

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Amit Dave Reporting
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