इमलीपारा क्वारंटाइन सेंटर में सब्जी बनाने के लिए 580 रुपए किलो की दर से खरीदा टमाटर

कोरोना महामारी में क्वारंटाइन सेंटरों में खाद्य सामग्री क्रय करने में बड़े पैमाने पर भर्राशाही होने का मामला सामने आ रहा है।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 29 Aug 2020, 03:27 PM IST

कांकेर. कोरोना महामारी में क्वारंटाइन सेंटरों में खाद्य सामग्री क्रय करने में बड़े पैमाने पर भर्राशाही होने का मामला सामने आ रहा है। सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेजों में इमली पारा क्वारंटाइन सेंटर में सब्जी बनाने के लिए 580 रुपए किलो की दर से टमाटर खरीदी किया गया है। अप्रैल और मई माह में जिन सब्जियों का बाजार में 10 रुपए किलो मूल्य था उन्हें क्वारंटाइन सेंटरों में 40-40 रुपए की दर से खरीदी किया गया है। एक दिन में दो-दो सौ लोगों के लिए सब्जी क्रय किया गया है।

सूचना के अधिकार मिले दस्तावेजों में 29 अप्रैल को 580 रुपए किलो की दर से खरीदी किया गया है।3 मई को 25 किलो बरबट्टी, 30 किलो भिंडी 40-40 रुपए की दर से क्रय किया गया। इसी दिन 15 किलो कटहल 40 रुपए की दर से, 40 किलो पालक 35 रुपए प्रति किलो की दर से क्रय किया गया। 550 रुपए में दो किलो टमाटर खरीदी गया है। 4 मई को 35 किलो मुनगा 40 रुपए की दर से, कुम्हड़ा 60 किलो 20 रुपए की दर से,लोकी 20 किलो 20 रुपए की दर से, में ो टमाटर दो किलो 500 रुपये में क्रय किया गया।

5 मई को 35 किलो पालक 40 रुपए की दर से, परवर 30 किलो 40 रुपए की दर से खरीदा गया। इस दिन टमाटर का मूल्य एक किला 500 रुपए दिखाया जा रहा है। 6 मई को 25 किलो भिंडी 40 रुपए की दर से, लौकी 20 रुपए की दर से 20 किलो, टमाटर 480 रुपए किलो क्रय किया गया। 17 मई को 20 रुपए की दर से पांच किलो टमाटर खरीदा गया। 18 मई को टमाटर का मूल्य फिर 500 रुपए किलो की दर से क्रय किया गया है। इमली पारा क्वारंटाइन सेंटर की देखरेख के साथ खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने की जिम्मेदारी आदिमकल्याण विभाग को जिला प्रशासन की ओर सौंपा गया था।

क्वारंटाइन सेंटरों में भले ही लोगों को अव्यवस्था का सामना करना पड़ा हो लेकिन विभाग के जिम्मेदारों ने लम्बी चौड़ी खर्च की लिस्ट तैयार कर लाखों रुपए का भुगतान भी नकद में करा लिया है। कोरोना की महामारी में जहां एक-दूसरे के जीवन को बचाने के लिए शासन से करोड़ों का बजट आ रहा वहीं, जिम्मेदारी संभाल रहे लोग अपनी-अपनी पकेट भरने में लगे हुए हैं। कोरोना महामारी में जिले में डेढ़ करोड़ से अधिक राशि लोगों की सुरक्षा एवं पेट भरने के लिए शासन से मिला था। कहीं, वाहन के नाम पर तो कहीं भोजन के नाम पर प्रदेश में सबसे अधिक बंदरबांट कांकेर जिले में हुआ है।

हालांकि विभाग के जिम्मेदार इस संबंध में एक दूसरे की जिम्मेदारी दिखाकर पल्लाझाड़ने में लगे हुए हैं। इस संबंध में पत्रिका टीम ने कान्हा भोजनालय चलने वाले और मंडी में सब्जी बेचने वाले से अप्रैल मई माह में सब्जी के दर की जानकारी ली तो दोनों ने कहा, तब 5-10 रुपए किलो में टमाटर की दर थी। बरबट्टी 20 रुपए किलो, भिंडी 10 रुपए, 10 रुपए किलो पालक की दर थी। ऐसे में साफ हो गया कि कोरोना में मिली राशि से जिम्मेदारों ने बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया है।

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