
आतंकियों को छलनी करेगी एके -203 से निकली स्टील की बुलेट
कानपुर. एक सप्ताह का इंतजार और, इसके बाद स्वदेशी असाल्ट रायफल से आतंकियों के जिस्म को छलनी किया जाएगा। मार्च से देश की तीन आयुध निर्मार्णियों में एके - 47 के स्वदेशी उन्नत वर्जन एके - 203 का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। पहली खेप में कानपुर की स्माल आम्र्स फैक्ट्री (एसएएफ) को बीस हजार असाल्ट रायफल बनाने का आर्डर मिला है। इसी के साथ अमेठी की नवनिर्मित आयुध फैक्ट्री में भी असाल्ट रायफल के उन्नत संस्करण का निर्माण किया जाएगा।
पिछले बरस अप्रैल में समझौता, मार्च से उत्पादन
दुनिया की फौजों की पहली पसंद असाल्ट राइफल एके-47 का निर्माण अब देश की आयुध फैक्ट्रियों में होगा। अभी तक तकनीकी और पेटेंट के अभाव में अभी तक एके-47 के लिए भारत को रूस के साथ-साथ स्वीडन, इजराइल, अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता था। अब ऐसा नहीं होगा। पिछले साल अप्रैल में रक्षा मंत्रालय और रूस की सबसे बड़ी हथियार निर्माता कंपनी ‘कलाश्निकोव कंसर्न’ के साथ करार के मुताबिक, रूस और भारत की आयुध कारखाने आवटोमैट कलाशनिकोवा असाल्ट रायफल यानी एके-47 के नए और अतिआधुनिक वर्जन को मिलकर बनाएंगी। मेक इन इंडिया योजना के तहत देश में 7.47 लाख असाल्ट रायफल का निर्माण किया जाएगा। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यूपी के कानपुर, अमेठी के साथ-साथ बिहार के नालंदा तथा तमिलनाडु की त्रिचुरापल्ली आयुध फैक्ट्री में स्वदेशी असाल्ट रायफल का निर्माण होगा।
अमेठी- कानपुर में बनेंगी एके - 203 सीरिज का रायफल
कानपुर आयुध निर्मार्णी के मुताबिक, एके-47 के उन्नत संस्करण के कंपोनेंट की डिजाइन पहुंच गई है। यहां एक साल में बीस हजार असाल्ट राइफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। नए अनुबंध में एके-47 की तकनीकी मुहैया कराने के साथ-साथ एके सीरिज की नई असाल्ट राइफल एके-100 की खरीद-फरोख्त का समझौता भी हुआ है। स्वदेशी असाल्ट रायफल 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम के तहत भारत में बनाई जाएंगी। इस करार में भारत सरकार की पॉलिसी के तहत ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के पास मेजॉरिटी शेयर 50.5 फीसदी रहेगा, जबकि रूस के पास 49.5 फीसदी शेयर होंगे।
पानी के अंदर भी स्टील की गोली सीधे जाएगी
पानी के अंदर निशाना लगाना आसान नहीं होता है। वजह है कि पानी के घर्षण के कारण गोली बहक जाती है। अलबत्ता एके-203 से पानी के अंदर से हमला करने पर भी गोली सीधे जाएगी। वजह यह है कि स्टील का बुलेट की गति इतनी तेज होती है, कि पानी का घर्षण भी उसे कम नहीं कर पाता है। एके-203 राइफल में पहले की सभी राइफल तकनीकों का मिश्रण है। अगर विस्तार से देखें तो इसके लॉकिंग डिजाइन को एम1 ग्रांड राइफल से लिया गया है। इसका ट्रिगर और सेफ्टी लोक रेमिंगटन राइफल मॉडल 8 से लिया गया है, जबकि गैस सिस्टम और बाहरी डिजाइन एस.टी.जी.44 से लिया गया है।
एके नाम के पीछे छिपा है नायाब रहस्य
अक्सर ही यह सवाल कौंधता है कि आखिरकार देश-दुनिया की फौज की पहली पसंद बनी असाल्ट राइफल का नाम एके-47 क्यों पड़ा। दरअसल, इसके पीछे एक कहानी है। यह जानकार हैरानी होती है कि पृथ्वी के 106 देशों की सेना की पहली पसंद एके-47 का ब्लू प्रिंट किसी प्रयोगशाला और कई वैज्ञानिकों के बीच तैयार नहीं हुआ था। इस असाल्ट राइफल का खाका अस्पताल के बेड पर घायल सिपाही के दिमाग में तैयार हुआ था। कई सेनाओं के लिए एक स्तंभ का काम करने वाली एके-47 का आविष्कार रूस के फौजी मिखाइल कलाश्निकोव ने किया था, जिनका दो साल पहले निधन हुआ है। मिखाइल कलाश्निकोव के नाम पर ही इस स्वचालित रायफल का नामकरण किया गया है। मिखाइल कलाश्निकोव का जन्म 10 नवम्बर 1919 को रूस के अटलाई प्रांत के कुर्या गांव में एक बड़े परिवार में हुआ था। वर्ष 1938 में विश्वयुद्ध की आशंका के चलते उन्हें सेना में शामिल होने का मौका मिला तो कीयेव के टैंक मेकेनिकल स्कूल में तैनाती के दौरान उनका तकनीकी कौशल उभरने लगा था। वर्ष 1941 में एक भीषण युद्ध के दौरान कलाश्निकोव बुरी तरह घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अस्पताल के बिस्तर पर बिताए 6 महीनों में कलाश्निकोव ने अपने दिमाग में एक सब-मशीनगन का रफ डिजाइन तैयार कर लिया था। वह वापस अपने डिपो में लौटे और साथियों की मदद से मूर्तरूप दिया।
कठिन नाम को संक्षिप्त करने पर बना एके-47
जून 1942 में कलाश्निकोव की सब-मशीनगन वर्कशॉप में तैयार हो चुकी थी। चूंकि यह मिखाइल का ऑटोमैटिक हथियार है, इसलिए इसका नाम दिया गया आवटोमैट कलाशनिकोवा, जिसे बाद में ऑटोमैटिक कलाश्निकोव कहा जाने लगा। बोलने में मुश्किल होने की वजह से इसका नाम संक्षिप्त करते हुए एके-47 कर दिया गया। अब तो बाजार में एके-56, एके-74 और एके-100 भी उपलब्ध हैं।
Published on:
17 Feb 2019 12:55 pm
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