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अखिलेश के इस दांव से भाजपा में मचाई खलबली, अब दिल्ली में होगा मेयर की कुर्सी पर फैसला!

अखिलेश के इस दांव से भाजपा में मचाई खलबली, अब दिल्ली में होगा मेयर की कुर्सी पर फैसला!

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akhilesh yadav

Akhilesh Yadav

कानपुर. उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव की डुगडुगी बच चुकी है। सभी राजनीतिक दलों के नेता लोकसभा से पहले सूबा फतह करने के लिए जुटे हैं। इसी के तहत समाजवादी पार्टी और बसपा ने कई दिनों की चर्चा के बाद मेयर के नाम पर मुहर लगा दी। जिसके कारण सत्तादल भाजपा के अंदर खलबली मच गई है। तीन दिन तक चली मैराथन बैठक के बाद मेयर पद के लिए तीन नामों पर विचार के बाद लिस्ट लखनऊ पहुंचा दी गई, लेकिन अखिलेश के दांव के चलते अब मेयर की कुर्सी का फैसला दिल्ली दरबार से होगा।

अरुण तोमर के नाम पर बनी सहमति

नमांकन की आखरी तारीख आने से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर से मेयर पद के लिए पूर्व विधायक अरुणा तोमर के नाम पर मुहर लगा दी। जिसके बाद भाजपा के नेता भी एक्शन में आ गए और रात में प्रदेश कार्यालय में क्षत्रिय नेताओं को तलब कर लिया गया। पार्टी अब फिर से जातिगत आंकड़ों के जरिए मेयर का सिंबल जिताऊ प्रत्याशी को देने के लिए मंथन कर रही है।

जानकारों का कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नामों की सूची दिल्ली मंगवाई है। जहां वो शहर से सांसद मुरली मनोहर जोशी के साथ ही संघ के नेताओं के साथ चर्चा करने के बाद आज एक नाम पर अपनी सहमति दे देंगे। इसी के बाद कई भाजपाई अपने करीबियों के साथ दिल्ली की ओर कूच कर गए हैं, जिसमें दो नामी स्कूल के प्रबंधक भी हैं।

तो कमल पर ब्रेक लगाने के लिए अखिलेश की चाल

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने निकाय चुनाव अकेले-अकेले लड़ने का एेलान कर चुके हैं, लेकिन अंदरखाने दोनों दलों के बीच खिचड़ी पक रही है। लगातार कानपुर से मेयर की कुर्सी पर भाजपा जीतती आई और 2017 में ब्रेक लगाने के लिए अखिलेश ने क्षत्रीय समाज से अरूणा तोमर को टिकट देकर भाजपा के समीरकण बिगाड़ दिए है।

कानपुर में ब्राम्हण के बाद क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या है, जो पिछले चुनाव में भाजपा के पक्ष में खड़े दिखे। अरूणा तोमर के चुनाव में उतरने से भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है और इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। कांग्रेस ने मेयर पद पर ब्राम्हण चेहरे पर दांव लगाए जाने पर लगभग-लगभग सहमति बन गई है।

मुस्लिम निर्णायक भूमिका करेगा अदा

पिछले दो चुनाव में कानपुर के करीब साड़े तीन लाख मतदाता बसपा समर्थित सलीम अहमद के पक्ष खड़े दिखे, लेकिन 2017 में किसी भी दल ने मुस्लिम को टिकट नहीं दिया। इसी के चलते जिधर मुस्लिम वोटर जाएगा, वही मेयर की कुर्सी पर विराजमान होगा।

जानकारों का मानना है कि इसबार भाजपा को हराने के लिए मुस्लिम मतदाता सपा और कांग्रेस के जिताऊ कैंडीडेट के साथ खड़ा नजर आएगा। इस बात से भाजपा के नेता भलीभांति वाकिफ हैं और इसलिए कानपुर की कुर्सी को लेकर जबरदस्त माथा-पच्ची चल रही है। सूत्रों की माने तो भाजपा और संघ ने नामी स्कूल के प्रबंधक की पत्नी का नाम फाइलन कर दिया था, लेकिन अरूणा तोमर के आने के बाद भाजपा नए सिरे से फिर विचार शुरू कर दिया है।

परिवार के पास मत के साथ रुतबा भी

एक पदाधिकारी की मानें तो कानपुर की मेयर सीट सबसे अधिक विवादित हो चुकी है। यहां से कई दर्जन आवेदन आए। लेकिन चर्चाओं में एक नया शैक्षणिक कारोबारी का परिवार रहा। इस परिवार के लिए भाजपा के एक धड़े ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एड़ी-चोटी का जोर लगाया। अंदरखाने की मानें तो कानपुर सांसद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी और उनकी टीम इस घराने को हर कीमत पर भजपा ज्वाइन कराने की कवायद कर रहा था। भाजपा के एक बड़े नेता ने कानपुर के इस चर्चित और बड़े राजनीतिक घराने को दिल्ली पहुंचने का आमंत्रण भी दे दिया। आमंत्रण के कुछ घंटे बाद ही 'शिक्षा क्वीन' दिल्ली के लिए रवाना हो गई। इस समय वह दिल्ली में ही हैं। इस परिवार के पास राजनीति रसूख के साथ पैसा और मत भी हैं, लेकिन तोमर के आने के बाद भाजपा में नए सिरे से नाम को लेकर मंथन शुरू हो गया है।