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पांच मौतों पर अखिलेश का सीएम पर वार, संभल नहीं रहा प्रदेश तो कर दें रिजाइन

पूरी तरह फेल हो गई योगी सरकार, तहस-नहस स्वास्थ्य व्यवस्था

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Akhilesh Yadav spoke in kanpur patients are dying in icu and nicu

पांच मौतों पर अखिलेश का सीएम पर वार, संभल नहीं रहा प्रदेश तो कर दें रिजाइन

कानपुर। यूपी के सबसे बड़ी हैलट अस्पताल में आईसीयू की एसी खराब होने के चलते पांच मरीजों की मौत हो गई। यह खबर जैसे शासन, प्रशासन को हुई तो कानपुर से लेकर लखनऊ तक में हड़कंप मच गया। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजी हेल्थ केके गुप्ता अस्पताल पहुंचे और हैलट प्रशासन को क्लीन चिट दे कर चले गए। लेकिन पांच मौतों के बाद सियासत शुरू हो गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में तो अस्पतालों में बच्चे तथा गरीब सुविधा के अभाव में मर रहे हैं। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज के बाद फर्रुखाबाद और अब कानपुर मेडिकल कालेज में एसी प्लांट बंद होने के कारण पांच लोगों की मौत गंभीर लापरवाही है। अखिलेश ने कहा कि इस सरकार ने सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल कॉलेजों को तहस-नहस कर दिया है। सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था ही चौपट हो गई है। कोई मरीजों को रिक्शे पर तो कोई ठेले और टांगे से ले जा रहा है। लोगों को एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल रही है। अस्पतालों में मरीजों की न जांच हो रही है और न ही दवाएं मिल रही हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि यह सरकार सिर्फ उद्घाटनों का ही उद्घाटन कर रही है।
पूरा सिस्टम पटरी से उतरा
हैलट अस्पताल में आईसीयू की एसी खराब होने के चलते पांच मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई। हैलट प्रशासन जान कर अनजान बनता रहा। लेकिन जैसे ही यह खबर आईसीयू से बाहर आई वैसे हड़कंप मच गया। हैलट में अधिकारियों और नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया। डीजी हेल्थ ने एसी के चलते नहीं बल्कि गंभीर बीमारियों के कारण मरीजों की मौत की वजह बताई तो डीएम सूरेंद्र सिंह ने भी जांच के नाम पर चार सदस्यीय टीम का गठन कर दिया। टीम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी। इसी बीच पांच मौतों पर सियायत गर्म हो गई। पूवे सीएम अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर जमकर जुबानी हमला बोला और आजादी के बाद की सबसे भ्रष्ठ का तमगा योगी सरकार को दिया। अखिलेश ने कहा कि गोरखुप, फर्रूखाबाद और अब हैलट में मरीज डॉक्टर्स की लापरवाही के चलते काल के गाल में समा गए। जांच और कार्रवाई के नाम पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुछ भी नहीं किया।
प्रदेश अध्यक्ष ने भी सुनाई खरी-खरी
सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम कानपुर पहुंचे और पार्टी कायालर्य नवीन माकेट स्थित रोजा इफ्तार भाग लिया। इस मौके पर सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरसारी अस्पतालों की आईसीयू और एनआईसीयू में मरीजों की मौत हो रही है। अस्पताल में मरीजों को दवाएं नहीं मिलती है। बच्चों को ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है तो आईसीयू में एसी फेल हो रहे हैं। सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्री लोगों को गुमराह करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की सेवाएं चरमरा गई हैं। मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा। लोग स्ट्रेचर के लिए तड़प रहे। कंधों पर शव रखकर लोग अपने घरों पर जा रहे। सरकार संवेदनशून्य हो गई है। सपा सरकार ने अस्पतालों में सेवाएं बेहतर की थीं। उन्होंने एसी फेल होने से मृतक परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और आर्यनगर से सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी को जांच कर रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास भेजने को कहा
सपा विधायक करेंगे जांच
समाजवादी पार्टी आर्यनगर से विधायक अमिताभ सोलंकी हैलट में मरीजों के तीमारदारों से बात करेंगे और पांच मरीजों की मौत की जांच की अखिलेश यादव को पहुंचाएंगे। सपा विधायक ने बताया कि उर्सला अस्पताल में गुरूवार को हमने सीएमओ का घेराव किया और अनेक समस्याओं के बारे में उन्हें अवगत कराया। कानपुर के सभी सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी हैं। डॉक्टर्स अस्पतालों में कम अपने प्राईचेट क्लीनिकों में ज्यादा समय देते हैं। हैलट से लेरक उर्सला के 90 फीसदी डॉक्टर मरीजों का इलाज अपनी क्लीनिकों में कर रहे हैं। दो सांसद, दो मंत्री और पांच विधायक होने के बावजूद उन्हें अस्पतालों की हालत नहीं दिखती। समाजवादी लोग गरीबों को न्याय के लिए लड़ेंगे और एसी खराब होने के कारण मरीजों की मौत हुई है तो प्रिंसिपल, सीएमएस के साथ ही अन्य आलाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए धरने पर बैठेंगे।
17 मौतों के जिम्मेदारों पर नहीं हुई कार्रवाई
समाजवादी पार्टी ग्रामीध जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेश पर आधा दर्जन सपा पदाधिकारियों के साथ हमने कानपुर नगर व देहात में जहरीली शराब पीने से मौत की जांच की। जिसमें पता चला कि सिपाही, थानेदार, आबकारी इंस्पेक्टर से लेकर अलाधिकारी जिम्मेदार थे। उन्हीं के इशारे में पर शहर में शराब का अवैध करोबार फल्-फूल रहा था। 17 लोगां की जान के बदले योगी सरकार ने नीचे स्तर के कर्मचारियों को सस्पेंड कर खानापूर्ति कर ली। जबकि इसमें जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी आयुक्त के साथ पुलिस के अलाधिकारियों की भी जवबदेही बनती थी, लेकिन सरकार ने उन्हें क्लीन चिट दे दी। अखिलेश सरकार होती तो दोषी अफसरों पर सौ फीसदी कार्रवाई होती।