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रामशंकर कठेरिया ने मायावती को दे दी बड़ी चुनौती, दलित के घर भोजन कर लें तो छोड़ दूंगा राजनीति
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रामशंकर कठेरिया ने मायावती को दे दी बड़ी चुनौती, दलित के घर भोजन कर लें तो छोड़ दूंगा राजनीति

एक दिवसीय पर पहुंचे कानपुर, बसपा प्रमुख को बताया दलित विरोधी, एससी-एसटी एक्ट पर रखी राय

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कानपुर। एससी-एसटी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बीजेपी नेता रामशंकर कठेरिया बुधवार को एक दिवसीय दौरे के लिए कानपुर पहुंचे। सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ जमकर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने उनको मुख्यमंत्री बनाया पर उन्होंने दलितों का सबसे ज्यादा नुकसान किया। मायावती ने सिर्फ अपना और अपने परिवार का ही के घर को सजाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एलान किया अगर मायावती किसी दलित के घर एक वक्त का भोजन कर ले तो हम राजनीति छोड़ देंगे।

मायावती दलित विरोधी
रामशंकर कठेरिया ने बसपा सुप्रीमो मायावती को दलित विरोधी बताते हुए कहा उनके शासनकाल के दौरान दलित समाज का विकास नहीं हुआ। दलितों के वोट की बोली लगाकर वो अपनी तिजोरी भरती रहीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन राजशाही के साथ जिया है। हम भी दलित समाज से आते हैं और पिछले कई सालों से राजनीति में हैं और गरीबों के लिए जमीन पर उतर कर कार्य कर रहे हैं। मायावती बताएं कि वो कब अपने महल से बाहर आई। कब गरीब के घर जाकर रोटी खाई। हां चुनाव के दौरान उनका हेलीकॉप्टर आकाश के इर्द-गिर्द घुमता है।

स्वार्थ का गठबंधन
बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमलावर होते हुए कठेरिया ने कहा कि वह सपा से गठबंधन की बात कर रही है लेकिन यह स्वार्थ का गठबंधन है और किसी रूप में हो नहीं रहा है। सपा और बसपा दोनों 2022 में सत्ता का सपना देख रही हैं, लेकिन इस ये होने वाला नहीं है। कठेरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जितना कार्य दलितों के लिए किया है, उतना आजादी के बाद से किसी सरकार ने नहीं किया। मैं मायावती को चैलेंज करता हूं कि अगर वो अपने आपको दलितों का नेता मानती हैं तो एक दलित के घर जाकर भोजन कर के दिखाएं। अगर ऐसा उन्होंने कर दिया तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।

पहले दलित समाज में लगाई आग
एससी-एसटी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया ने कहा कि मोदी सरकार ने एससी-एसटी एक्ट के पुराने कानून को बहाल किया है, पर इससे किसी निर्दोष को नहीं फंसाया जा सकता। कठेरिया ने बताया कि एससी-एसटी एक्ट वीपी सिंह लेकर लाये थे। तब से उसमें कोई विशेष परिवर्तन नहीं किए गए। थावरचंद गहलोत ने जब एससी-एसटी एक्ट में और कई मुद्दे जोड़े थे उसके बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने उसमे संशोधन किया तो पूरे देश में हल्ला हुआ। सुप्रीम कोर्ट के संशोधन के बाद एससी वर्ग भी सड़कों पर उतरा था। इस समाज के लोगों को समझाने की जरूरत थी, पर विरोधी दलों ने इसमें सियासत की। देश में ऐसा महौल बना दिया गया कि मोदी सरकार दलित विरोधी है, पर उनके सपनों को इसी समाज के लोगों ने चूर कर दिया। संसद में सर्वसम्मति से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संशोधन कर वापस किया गया।

फिर सवर्णो को भड़काया गया
कठेरिया ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के नाम पर पहले दलितों में आग लगाई गई और फिर सवर्णो के अंदर नफरत पैदा करने की कोशिश विपक्षी दलों ने किया। कठेरिया ने कहा कि बीस साल पहले जो एससी-एसटी एक्ट था वही दोबारा बनाया गया है। इसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया। एससी-एसटी एक्ट के मामले में कोई निर्दोष व्यक्ति को सजा ना मिले है यह जिम्मेदारी पुलिस की है । कठेरिया का कहना है की आगरा जिले में समीक्षा करने पर पता चला कि एक साल में 16 हजार केस दर्ज किये गए, जिसमें 16 हजार में एससी-एसटी के 156 केस थे।

मिलना चाहिए रिजर्वेशन
कठेरिया ने कहा कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाती और पिछड़ी जाती के छात्रों को रिजर्वेसन नहीं मिल रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने कहा था कि अलीगढ यूनिवर्सिटी मायनारटी यूनिवर्सिटी नहीं है। 2005-06 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कि एमएचआरडी ने कहा था मायनार्टी कमीशन ने हमको लिखकर दिया है कि अलीगढ यूनिवर्सिटी मायनारटी यूनिवर्सिटी नहीं। अलीगढ यूनिवर्सिटी में रीजर्वेसन ना मिलना दुर्भागयपूर्ण और चिंता की बात है। ऐसा लग रहा है कि जैसे अलीगढ यूनिवर्सिटी भारत के अंदर है ही नहीं है। कमीशन खुद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने जा रहा है।