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पिता की बात सुन बन गए भगीरथ, झीलों की नगरी को संवार रहे जीशान

बीकाम करने के बाद समाजसेवा में लग गए मोहम्मद जीशान , तीन सालों से लगातार जलाशयों का करा रहे हैं जिर्णोद्धार

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बीकाम करने के बाद समाजसेवा में लग गए मोहम्मद जीशान , तीन सालों से लगातार जलाशयों का करा रहे हैं जिर्णोद्धार

कानपुर। एक था बिहार का माउंटेन मैन दशरथ मांझी, जिसने अकेले 22 साल तक पहाड़ खोदकर नया रास्ता बना दिया था, क्योंकि इनकी पत्नी की पहाड़ से गिरने की वजह से ही मौत हो गई थी। बाद में इनसे प्रेरति होकर कई लोग दशरथ मांझी बने। हाल ही में बिल्हौर तहसील के आबंडकर नगर वार्ड के निर्विरोध सभासद मोहम्मद जीशान अपने नगरवासियों के लिए माउंटेन मैन मांझी बन गए और उन्होंने झीलों की नगरी को सवांरने के लिए अपने कुछ युवा दोस्तों के साथ निकल पड़े। तीन साल के दौरान जीशान ने झीलों और तलाबों को खोजा और 50 से ज्यादा जलाशयों का जीर्णोद्धार करा उन्हें पानी से लबालब भरवाया। जीशान ने बताया कि बीकाम परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कानपुर से बिल्हौर अपने घर आए। पिता ने झीलों के इतिहास के बारे में बताया। कहानी सुन हमने बैंक अधिकारी बनने के बजाए भगीरथ बनने का प्रण ले लिया। पिछले 3 साल से सूखें जलाशयों में पानी भरवा कर पुण्य कमा रहे हैं।
1290 जलाशय हैं बिल्हौर
शहर के बिल्हौर तहसील किसी वक्त झील-ताल, तलैया के नाम से पूरे प्रदेश में पहचानी जाती थी, लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के चलते 1290 में 1150 तालाब सूखे पड़े हैं और इंसान-बेजुबान हलकान है। पर प्राकृतिक धरोहरों को संवारने और पटरी में लाने के लिए मोहम्मद जीशान ( निर्विरोध सभासद) आंबेडकर नगर बिल्हौर पिछले तीन सालों से लगे हुए हैं। जिशान को अब यहां के लोग भागीरथ के नाम से पुकारते हैं। जिशान भोर पहर अपने साथ युवाओं की टीम लेकर निकल पड़ते हैं और विलुप्त झीलों-तलाबों को खोज कर उनका निर्माण और पानी भराकर लाबलब करा रहे हैं। जीशान ने बताया कि अभी तक 50 से ज्यादा तलाबों को मूमाफियाओं के चंगुल से मुक्त करा उन्हें हरा-भरा कर दिया है। आगे भी हमारा कारवां जारी रहेगा। बिल्हौर को हम फिर से झीलों की नगरी के तमगे को लाकर रहेंगे।
1150 तालाब सूख गए थे, कुछ लबालब
बिल्हौर ब्लॉक के पंचायत सचिवों ने कागजी बाजीगरी से सैकड़ों तलाबों में अभिलेखों में पानी भरा दर्शा दिया है। जबकि हकीकत कुछ और ही है। ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत कुल 1290 तालाब हैं, जिनमें से 1150 सूखे पड़े थे। जिशान ने बताया कि मुख्यमंत्री लाखों की लागत से जलाशयों की खुदाई कराने और इनका जीर्णाद्धार कराए जाने का आदेश दिया था। लेकिन गर्मी में इन तालाबों में एक बूंद पानी न होने से इसका लाभा ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। तलाबों और झीलों में पानी नहीं होने से जहां इंसान परेशान है तो वहीं वन्य जीव प्यास से मर रहे हैं। जीशान ने सीएम योगी से मांग करते हुए कहा है कि तलाबों में पानी भरवाने के आदेश दें, साथ ही जिन्होंने पानी के नाम पर अपनी जेब भरी है, उनकी जांच करा जेल भेजें। जीशान ने बताया कि हमने खंड विकास अधिकारी को लिखित में तालाबों के आंकड़ें उन्हें देकर अवगत कराया कि भूमाफियाओं ने अभी भी कई तालाबों में कब्जा जमाए हुए बैठे हैं उन्हें मुक्त कराएं, पर उनके कानों में अभी तक जूं तक नहीं रेंगी।
इस समस्या से दिलाया छुटकारा
कानपुर जिले की सबसे बड़ी मत्स्य झील जो औरगपुर गांव में है वह पूरी तरह से सूख गई थी। 2016-17 में इस झील की खुदाई के साथ ही नालियों के निर्माण और पानी भरवाने के नाम पर शासन ने पांच लाख रूपए आवंटित किए थे। कुछ महिनों के बाद ही नालियों में कब्जे हो गए। इससे झील में पानी नहीं पहुंचा। जीशान ने बताया कि झील में पानी नहीं होने के चलतें दो दर्जन से ज्यादा गांव में बिकराल पेयजल समस्या उत्पन्न हो गई थी। ग्रामीण दूसरे गांव से पानी लाने को विवश थे। बताया, झील सूख जाने के चलते किसान अपने मवेशियों को कम कीमत पर बेच रहे थे। इसी समस्या से उन्हें छुटकारा दिलाने के लिए जिशान आगे आए और हाथ में फावड़ा लेकर निकल पड़े। जिशान और उनके साथियों ने झील में पानी लाए जाने के रास्ते बनाए। यह देख सरकारी बाबुओं की नींद टूटी और फिर वह साथ आए और आज की तारीख में झील लबालब भर गई है।
नालियों में कर लिए कब्जे
बिल्हौर ब्लॉक के उत्तरीपुरा गांव में करीब सात लाख रूपए की लागत बनाए गए आदर्श तलाबों की नालियों पर अवैध कब्जे हो जाने के चलते 1 हजार तालाबों में पानी नहीं भरा जा सका। खुजेरी ग्राम पंतायत के भी सभी तालाबों में अधिकारियों की ढिलाई के चलते सूखा पड़ा है। इसी तरह बरौली, बिल्हौर, कुदौरा, सुभानपुर, शाहपुर कोट, दरियापुर, बीरामऊ, नदही, रामपुर, नरूआ, अरौल, बारंडा, हिलालपुर, चोरसा, सहित सैकड़ों गांवों में ग्रामीण तालाबों को भरवाने के लिए प्रधान से लेकर अफसरान तक फरियाद लगा चुके हैं, लीकिन इनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई। उत्तरीपुरा के शिवचरन प्रजापति ने कहा कि तालाब सूखे पड़े होने के चलते मवेशियों को बिना रूपए लिए ही बेच रहे हैं। प्रजापति ने आंबेडकर नगर के सभसभ जीशान को इस समस्या से अवगत कराया। जिशान तहसील के बाहर तालाबों में पानी भरवाने के लिए धरने पर बैठ गए और मामला बढ़ता देख अधिकारी जागे। कुछ तालाबों में पानी भरवाया।
कई वन्यजीवों की हो रही थीं मौतें
दस एकड़ की नदीहा खुर्द झील सूखी पड़ी होने से वन्य जीवों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा था। पिछले साल प्यास से दो वन्य जीवों की मौत के बाद भी प्रशासन नही जागा। मनरेगा के एपीओ ने गांव जाकर झील में पानी भरवाने की तैयारी की। लेकिन धरातल पर कुछ भी नही हो सका। जिशान ने पूर्व सीडीओ अरूण कुमार से मिले और झील की दुर्दशा से अवगत कराया। सीडीओ ने खुद मौके पर जाकर निरीक्षण किया और अधिकारियों को झील में पानी भरवाने के निर्देश दिए, जिसके बाद वह लबालब भर सकी। जिशान बताते हैं कि नदीहा खुर्द के पास काफी दूर तक फैले जंगल में रहने वाले वन्य जीव प्यास बुझाने के लिए झील तक आते थे, जिन्हे कुत्ते जीशान बना रहे थें े बताया कि कानपुर देहात की सीमा लगने के कारण काफी क्षेत्र सूनसान है। भीषण गर्मी में बबूल के जंगलों की छांव में रहने वाले वन्य जीव पानी के लिए झील तक आते है। लेकिन झील व तालाब सूखे पड़े होने के चलते वन्यजीवों पर पर कुत्ते हमला कर देते थे। लेकिन झीन में पानी भर जाने से इंसानों के साथ वन्यजीव खुश हैं।

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