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प्रिंसिपल ने दलित छात्रों से धुलवाई कुर्सी, विरोध करने पर सरपंच को भगाया

 महिला सरपंच जब विरोध करती है, तो ऊंची जाति के प्रिंसिपल  उससे भिड़ जाता है और हाथ पकड़कर स्कूल से बाहर निकाले जाने के साथ जातिसूचक गाली भी देता है।

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Sujeet Verma

Feb 04, 2016

कानपुर देहात. आज भी स्कूल में जाति के हिसाब से पढ़ाई और बैठने को चटाई मिलती है। दलित सरपंच जब स्कूल जाती हैं और इस पर आपत्ति जताती हैं तो प्रिंसिपल भिड़ जाते हैं, जिस कुर्सी पर महिला सरपंच बैठी थीं। प्रिंसिपल उसको दलित बच्चों से सरपंच के सामने ही धुलवाते हैं। महिला सरपंच जब विरोध करती है, तो ऊंची जाति के प्रिंसिपल से उससे भिड़ जाता है और हाथ पकड़कर स्कूल से बाहर निकाले जाने के साथ जातिसूचक गाली भी देता है।

महिला सरपंच पूरे मामले को लेकर डीएम से मिलकर शिकायत करती हैं। शिकायत के बाद पूरा प्रशासन अमला हरकत पर आकर कार्रवाई की बात कही जा रही है। मामला कानपुर देहात के बिरसिंहपुर के प्राथमिक स्कूल गांव का है। डीएम ने तहसीलदार को मौके पर भेजकर जांच करने के आदेश दे दिए हैं।

बच्चों के दर्ज किए बयान
तहसीलदार ने स्कूल पहुंचकर बच्चों और ग्राम प्रधान के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान तहसीलदार ने मामला घुमाने का प्रयास किया लेकिन ग्राम प्रधान सच्चाई पर अड़ी रहीं और लिखित बयान में भी दोहराया कि स्कूल में दलित बच्चों के साथ भी यही व्यवहार होता है। स्कूल में पुलिस तैनात की गयी है, गांव और आसपास क्षेत्र में तनाव है, दलित नेता गांव पहुंचने शुरू हो गए हैं।

ग्राम प्रधान मंगलवार को दलित बच्चों की शिकायतों पर स्कूल पहुंची थीं, उनके साथ और लोग थे तो प्रधानाध्यपक ने कुर्सी पर बैठने को कह दिया। जैसे ही वह जाने लगीं प्रिंसिपल संतोष कुमार शर्मा ने बच्चों को पानी लाकर कुर्सी धोने को कहा। कुर्सी धुलने लगी तो दलित ग्राम प्रधान पप्पी ने इस पर आपत्ति जतायी। फिर क्या था प्रधानाध्यापक ने न केवल जाति सूचक गालियां बकनी शुरू कर दीं बल्कि उनका हाथ पकड़कर मरोड़ दिया।

36 बच्चे बैठते हैं जमीन में, 31 चटाई पर
बुधवार को सुबह तहसीलदार अकबरपुर तहसीलदार राकेश कुमार जांच को पहुंचे, पहले उन्होंने बच्चों के बयान दर्ज किए, स्कूल में 66 बच्चों में से करीब 35 दलित हैं। दलित बच्चों ने भेदभाव और उत्पीड़न की बात बतायी।

पूछने पर पता चला कि प्रिंसिपल ने एसएमएस करके आकस्मिक अवकाश ले लिया है। तहसीलदार ने स्कूल में ग्राम प्रधान के बयान दर्ज किए, तमाम घुमाने के बाद भी वह सच्चाई पर अड़ी रहीं। इस दौरान स्कूल में गांव और आसपास के सैकड़ों लोग जमा हो गए। गांव में धीरे- धीरे नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है, घटना के बहाने सभी दलितों के बीच घुसपैठ बनाना चाहते हैं।

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