हमने जिस दिन बसपा से नाता तोड़ा था, उसी दिन बसपा से जुड़े लोगों
से कहा था कि अब वह 1989 वाली बहन जी नहीं रहीं, बल्कि धन की इच्छा रखने
वाली देवी बन गई हैं। वह बिना चढ़ावे के किसी को टिकट नहीं देती, किसी ने
अगर उनके इस कदम पर बोला तो वह उसे बसपा से निकाल देती हैं। यह बात उस समय
हमने स्वामी प्रसाद मौर्या से लेकर इंद्रजीत सरोज से तक कही थी। पर चलिए
देर से ही सही मौर्या जी ऊबकर धन की देवी के दल से बाहर आ गए हैं और अब हम
मिलकर आगे की राजनीति पर बैठकर विचार करेंगे। यह बात बसपा के सचिव व
मंत्री रहे दद्दू प्रसाद जाटव ने पत्रिका से खास बातचीत के दौरान कही।
दद्दू प्रसाद ने कहा कि जिस प्रकार मायावती ने 2012 में टिकट बेचकर यूपी के
पांच करोड़ मतदाताओं के विश्वास को तोड़ा है, उन्हें 2017 के आम चुनाव में
इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।