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‘अब बहन जी 1989 वाली नहीं रहीं, अब पैसों की पुजारिन हो गई हैं मायावती’

हमने जिस दिन बसपा से नाता तोड़ा था, उसी दिन बसपा से जुड़े लोगों से कहा था कि अब वह 1989 वाली बहन जी नहीं रहीं, बल्कि धन की इच्छा रखने वाली देवी बन गई हैं।

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Ankur Singh

Jun 27, 2016

daddu and mayawati

daddu and mayawati

विनोद निगम

कानपुर।
हमने जिस दिन बसपा से नाता तोड़ा था, उसी दिन बसपा से जुड़े लोगों
से कहा था कि अब वह 1989 वाली बहन जी नहीं रहीं, बल्कि धन की इच्छा रखने
वाली देवी बन गई हैं। वह बिना चढ़ावे के किसी को टिकट नहीं देती, किसी ने
अगर उनके इस कदम पर बोला तो वह उसे बसपा से निकाल देती हैं। यह बात उस समय
हमने स्वामी प्रसाद मौर्या से लेकर इंद्रजीत सरोज से तक कही थी। पर चलिए
देर से ही सही मौर्या जी ऊबकर धन की देवी के दल से बाहर आ गए हैं और अब हम
मिलकर आगे की राजनीति पर बैठकर विचार करेंगे। यह बात बसपा के सचिव व
मंत्री रहे दद्दू प्रसाद जाटव ने पत्रिका से खास बातचीत के दौरान कही।
दद्दू प्रसाद ने कहा कि जिस प्रकार मायावती ने 2012 में टिकट बेचकर यूपी के
पांच करोड़ मतदाताओं के विश्वास को तोड़ा है, उन्हें 2017 के आम चुनाव में
इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।


काशीराम के मिशन से भटकी पार्टी


चित्रकूट के मानिकपुर विधान सभा सुरक्षित सीट से लगातार तीन बार विधायक व
एक बार कैबिनेट मंत्री रहे दद्दू प्रसाद ने बताया कि बहुजन समाज पार्टी
अपने काशीराम के मिशन से पूरी तरह भटक चुकी है। बसपा में आज चाटुकारों का
बोलबाला है और मायावती भी उन्हीं की सुनती हैं। दल में ऐसे नेता आ गए हैं,
जो जमीन से नहीं जुड़े, सीधे हवाई जहाज से उतरकर विधानमंडल की कुर्सी पर
विराजमान हैं। इन्हीं चाटुकारों के चलते मिशन से जुडे़ लोगों को आए दिन
बाहर का रास्ता दिखाया जाता है या खुद निकल जाता है। पार्टी में अब केवल
उन्हीं की कीमत है जो बहन जी की तिजोरी भरता है।



25.29 फीसदी मतदाताओं को ठगा


दद्दू प्रसाद ने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में ऐन वक्त पर रुपए के
चलते सैकड़ों उम्मीदवारों के टिकट काटे गए। जिसका परिणाम रहा कि पार्टी की
बुरी तरह हार हुई। उन्होंने कहा बहन जी ने पैसा लेकर टिकट देकर पांच करोड़
मतदाताओं को ठगा है। यह बात हर मतदाता जान चुका है। जिसके चलते लोकसभा चुनाव
में खाता भी नहीं खुल पाया। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को सपा से चार
प्रतिशत कम यानि 25.91 प्रतिशत मत मिले थे। जो कुल मतदाताओं के सापेक्ष
लगभग पांच करोड़ मतदाताओं ने पार्टी के पक्ष में मतदान किया था। दद्दू
प्रसाद ने कहा कि बहन जी का टिकट बेचने का खेल पुराना है, लेकिन मिशन से
जुड़े मतदाता सब कुछ जानते हुए भूल जाते है। जिसके चलते 2007 में प्रदेश में
सरकार बनी। लेकिन बार-बार टिकट बेचनें से इनकी पोल खुल गई। उन्होंने कहा
कि आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा की और दुर्गति होने वाली है।


दद्दू के साथ स्वामी भी जा सकते भाजपा में


स्वामी प्रसाद मौर्या लगातार कभी सपा तो कभी भाजपा में जाने के बारे में
जब दद्दू प्रसाद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बसपा के पुराने सभी साथी
मेरे साथ है। इन्हीं में से स्वामी प्रसाद मौर्या भी हैं। वह हमारे बड़े
भाई हैं। अभी उनसे मुलाकात नहीं हुई, हां आगे की राजनीति के बारे में फोन
पर जरुर चर्चा हुई है । इशारों - इशारों में वह इतना जरुर कह गए कि हम सपा
में शामिल नहीं होंगे और मेरी जो जानकारी है मौर्या जी भी उस दल में नहीं
जा सकते। कहा, हम बसपा के पुराने साथियों को पहले एकमंच पर लाने के लिए
प्रयास कर रहे हैं और जुलाई के प्रथम सप्ताह में हम आगे क्या करेंगे इसकी
जानकारी आपलोगों तक पता चल जाएगा।

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