बीएमडब्ल्यू कार, दस लाख रुपए दहेज तथा बीस लाख के जेवर बतौर दहेज दिए गए थे। बावजूद सपा विधायक ने एक और बीएमडब्ल्यू के लिए भाभी को दिलाया था तलाक
कानपुर. तीन तलाक पर सुप्रीम रोक के बाद पहला मुकदमा दर्ज हो गया। कानपुर में सपा की पूर्व विधायक और अखिलेश यादव के करीबी लोगों में शुमार गजाला लारी पर उनकी भाभी सोफिया अहमद ने केस दर्ज कराया है। इस मामले में सोफिया ने अपने पति शारिक अराफात के साथ-साथ ननद और विधायक रहीं गजाला लारी के पुत्र मंजर लारी समेत दो अन्य को दोषी बनाया है। कानपुर के स्वरूपनगर थाने में मंगलवार की देर शाम सपा नेत्री समेत पांचों के खिलाफ मुकदमा लिख लिया गया। इसके बाद सोफिया ने भाजपा का दामन भी थाम लिया।
एक और बीएमडब्ल्यू कार नहीं देने पर सोफिया को मिला तलाक
चेन्नई की सोफिया की शादी 12 जून 2015 को कानपुर के कर्नलगंज निवासी और टेनरी कारोबारी शारिक अराफात के साथ धूमधाम से हुआ था। इस निकाह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव समेत प्रदेश सरकार के ज्यादातर मंत्री शामिल हुए थे। वजह थी शारिक की बहन गजाला लारी का रसूख। उस वक्त गजाला लारी देवरिया के रामपुर कारखाना से सपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुई थीं। गजाला के न्योता पर अखिलेश सरकार की इस निकाह में शिकरत हुई थी। बहरहाल, सोफिया का आरोप है कि निकाह के दौरान बीएमडब्ल्यू कार, दस लाख रुपए दहेज तथा बीस लाख के जेवर बतौर दहेज दिए गए थे। बावजूद एक और बीएमडब्ल्यू कार के लिए उसे परेशान किया जाने लगा। गजाला लारी के उकसावे पर शारिक अराफात मारपीट भी करने लगे थे।
गजाला और मंजर लारी के कहने पर अराफात ने छोड़ दिया साथ
सोफिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विधायक बहन के उकसावे पर शारिक अराफात ने उसके साथ रिश्ता रखने से इंकार कर दिया। दिनांक 13 अगस्त 2016 को बहन गजाला लारी और भांजे मंजर लारी से बात करने के बाद नशे की हालत में शारिक अराफात ने शोफिया को तीन तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर लिया। शोफिया ने कहाकि, उस वक्त इंसाफ के लिए तमाम दरवाजे खटखटाए, लेकिन सपा सरकार में गजाला लारी के रसूख के कारण उसकी सुनवाई नहीं हुई। शोफिया के मुताबिक, रिश्ता खत्म करने और दहेज के लिए प्रताडि़त करने के मामले में शौहर शारिक अराफात, ननद गजाला लारी, भांजा मंजर लारी तथा सास-ससुर भी दोषी हैं।
हल्ला मचने पर घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया गया था
सोफिया को उसकी ससुराल से धक्का मारकर निकाल दिया गया। इसके बाद भी तलाक और दहेज के लिए प्रताडि़त करने का मामला सत्ता के दवाब में दर्ज नहीं हुआ। इस मामले ने राजनीतिक रंग पकडऩा शुरू किया तो सितंबर 2016 को कर्नलगंज पुलिस ने घरेलू हिंसा का मामला मामूली धाराओं में दर्ज करने के बाद फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस मामले में शारिक अराफात से पूछताछ तक नहीं हुई, जबकि तहरीर में नाम होने के बावजूद गजाला लारी और मंजर लारी के खिलाफ पुलिस ने एक्शन नहीं लिया था।