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कच्चा मकान ढहने से एक परिवार के 4 लोगों की मौत, आधा दर्जन घायल

बीती रात बारिश का कहर बिचौली गांव के एक परिवार पर ऐसा बरसा कि देखनेवालों की रूह कांप गयी। मलवे ने नीची दबे मासूमों व महिलाओं को निकालने में ग्रामीणों की आंखे बरसने लगी

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Ruchi Sharma

Aug 19, 2016

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कानपुर देहात. बीती रात बारिश का कहर बिचौली गांव के एक परिवार पर ऐसा बरसा कि देखनेवालों की रूह कांप गयी। मलवे ने नीची दबे मासूमों व महिलाओं को निकालने में ग्रामीणों की आंखे बरसने लगी। देर रात तेज बारिश होने पर थाना मंगलपुर क्षेत्र के बिचौली गांव के कुंवरलाल अपने परिवार के साथ अपने कच्चे घर में लेट गये। बारिश रुकने के करीब पंद्रह मिनट बाद कच्चा कोठरा भर भराकर गिर पड़ा। जिससे नीचे लेटे कुंवरलाल 45 वर्ष, उनकी पत्नी किताबश्री 42 वर्ष, पुत्रियां खुश्बू 25 वर्ष व पूनम 27 वर्ष शकुंतला 18 वर्ष, रूबी 4 वर्ष एवं पुत्र धीरू 8 वर्ष, हर्षित 12 वर्ष तथा नाती आर्यन 8 माह व प्रिया एक वर्ष मलवे में दब गये। मकान के ढहने पर चीख पुकार सुनकर ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

ग्रामीणों ने मलवे में दबे मासूम प्रिया, आर्यन, रूबी, हर्षित, धीरू सहित कुंवरलाल, किताबश्री सहित सभी को बाहर निकाला। जिसमें खुश्बू, आर्यन व प्रिया की मौके पर ही मौत हो गयी। तत्काल ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची झींझक चौकी पुलिस की मदद से एम्बुलेंस द्वारा अन्य घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झींझक में भर्ती कराया। जहां डॉ. राजेश कुमार ने हर्षित को मृत घोषित कर दिया तथा अन्य घायलों का उपचार शुरू किया। वहीं कुंवरलाल किताबश्री व शकुंतला को जिला अस्पताल रेफर किया।

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रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदल गयी

रक्षाबंधन के चलते कुरियन पुरवा रनिया अकबरपुर निवासी पूनम पत्नी रामसिंह अपनी एक वर्षीय पुत्री प्रिया व दबौली कानपुर निवासी खुशबू पत्नी राहुल दो दिन पूर्व अपने भाइयों धीरू, हर्षित की कलाई पर राखी बांधने के लिये अपने मायके बिचौली आयी थी। बीते दिन राखी बांधने के बाद पूरा परिवार खुशी-खुशी रात को खाना खाकर बाहर लेट गये। लेकिन देर रात तेज बारिश होने पर कुंवरलाल अपने पूरे परिवार के साथ अपने कच्चे कोठरे में लेट गया। करीब सुबह साढे तीन बजे बारिश रुकने के बाद कोठरा भर भराकर गिर पड़ा। जिसके बाद समूचे गांव सहित क्षेत्र में मातम छा गया।

लोहिया आवास की बजाय मिली मौत की सौगात


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करीब 15 वर्षाें से अपने कच्चे घर से निजात पाने के लिये कुंवरलाल ग्राम प्रधान से लेकर ब्लाक के चक्कर काट रहा था। लेकिन हर बार उसे निराश होकर वापस उसी कच्चे कोठरे में आकर सोना पड़ता था। जहा शुक्रवार की सुबह उसके परिवार के लिये काल बन गयी। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार कुंवरलाल ने आवास के लिये ग्राम प्रधान से कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुयी। रोजगार सेवक कॉलोनी के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग करता था। लेकिन गरीबी के चलते रुपये न दे पाने पर उसे मौत की सौगात मिल गयी।

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नहीं पहुंचे जिले के आला अधिकारी

शुक्रवार सुबह कुंवरलाल के परिवार पर दैवीय आपदा की गाज गिरी तो ग्रामीण एकजुट होकर उनकी मदद के लिये आगे बढ़े। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सहित अन्य तहसील कर्मियों को सूचना दी। बावजूद इसके करीब 6 घंटे तक कोई तहसील कर्मी नहीं पहुंचा। करीब साढे 9 बजे एसडीएम सुरजीत सिंह पहुंचे। जिसके बाद कानूनगों व लेखपाल ने पीड़ित की क्षति आंकलन किया। जबकि घटना की सूचना मिलते ही झींझक चौकी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार की मदद करते हुये उन्हे राहत पहुंचाई।

उपजिलाधिकारी सुरजीत सिंह ने बताया कि बेहद ही हृदय विदारक घटना हुयी है। मृतकों को तहसील प्रशासन द्वारा दैवीय आपदा राहत राशि के रूप में 4-4 लाख रुपये दी जायेगी। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका उपचार किया जा रहा है। मृतक परिवार के नाम पट्टे कराये जाएंगे साथ अन्य सम्भव मदद की जायेगी।

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