
अन्ना का तुड़वाया था अनशन, संत की मौत पर रो पड़े महंत
कानपुर। देश के आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने अपने निवास पर खुद को गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया, जहां कुछ मिनट के बाद उनकी मौत हो गई। यह खबर जैसे इंदौर से बाहर निकली, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। कानपुर में उनके भक्त रो पड़े। एतिहासिक हनुमान मंदिर के महंज जीतेंद्र दास को जैसे ही इसकी जानकारी हुई उन्होंने पूजा-अर्चना शुरू कर दी, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। महंत ने कहा कि आज देश ने एक महान संत को खो दिया, जिसकी भरपाई कर पान नामुकिन है। महंत ने बताया कि उन्होंने क्यों सुसाइड किया, इसकी अभी तक हमारे पास जानकारी नहीं है। वह पिछले साल कानपुर आए थे मंदिर आकर भगवान हनुमान के दर्शन किए थे। महाराज जी की दिली इच्छा थी की अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बिना विवाद के बनें और इसके लिए वह प्रयास कर रहे थे। महंत ने बताया कि अन्ना का अनशन भय्यूजी महाराज ने तुड़ाया था। सभी राजनीतिक दलों के नेता इनकी रिसपेक्ट करते थे।
कौन है गुरु भय्यूजी महाराज
भय्यूजी का जन्म 1968 में मध्यप्रदेश के शाजापुर के शुजालपुर में एक जमींदार परिवार में हुआ था। भय्यूजी का अध्यात्म और दर्शन के प्रति लगाव बचपन से ही रहा और वह तलवारबाजी और घुड़सवारी का भी शौक रखते थे। गांव से निकलकर जब भय्यूजी मुंबई पहुंचे तो उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की। हालांकि, प्राइवेट नौकरी में उनका मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बनाने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने नामी-गिरामी कंपनियों के लिए विज्ञापन भी किया। लेकिन अध्यात्म की तरफ झुकाव ने उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। दुनियादारी छोड़कर भय्यूजी ने इंदौर में सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं परमार्थ ट्रस्ट की स्थापना की और धार्मिक कार्यों में जुट गए।
भिक्षा मांग रहे बच्चों को दी शिक्षा
महंत जीतेंद्र दास ने बताया कि भय्यूजी महाराज ने श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट का गठन किया। यह ट्रस्ट मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सक्रिय है। महाराष्ट्र के बुलढाना के खमगांव में जरायाम पेशा जाति पारदी के बच्चों के लिए आश्रमशाला शुरू की, जिसमें सैकड़ों बच्चे पढाई करते हैं। महंत ने बताया कि आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने गृहस्थ जीवन को त्याग कर धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए लग गए। वह कईबार कानपुर आए और अपने प्रवचनों से भक्तों का मनमोहा। बताते हैं, पिछले साल पनकी हनुमान मंदिर आए थे। मंदिर के बाहर भिक्षा मांग रहे बच्चों के पास गए और उन्हें मंदिर ले आए। बच्चों को स्कूल जाने के लिए कहा और हर संभव मदद करने का वादा किया। उन्होंने एक दर्जन बच्चों के लिए धन दिया था।
इसके चलते सुर्खियों में आए भय्यूजी
आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज आलीशान जिंदगी जीते थे और लग्जरी कारों में चलते थे। भय्यूजी महाराज वही शख्स थे, जो पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने दिल्ली में अनशन में बैठे अन्ना हजारे के मामले में मध्यस्थता की थी। इसके बाद ही अन्ना ने अपना अनशन खत्म कर दिया था। तभी ये भी पता चला कि देशभर के कई आला नेता और मंत्री उनसे मंत्रणा लेते हैं। उनका सियासी जगत में नेताओं के बीच खासा असर है। उनके करीबी नेता हर पार्टी में रहे हैं। खासकर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक जगत में वो जाना पहचाना नाम थे।उनकी तस्वीरें प्रतिभा पाटील, नरेंद्र मोदी, नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, उद्धव ठाकरे, पृथ्वीराज चौहान और सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे बहुत से नेताओं के साथ देखने को मिल जाएंगी।
कई भाषाओं में देते थे प्रवचन
महंत जीतेंद्र दास ने बताया कि कुछ साल पहले उन्होनें हमें इंदौरा बुलाया। उस वक्त हमें पता चला कि . साधु-महात्माओं की पुरातन शैली की बजाए वे आकर्षक पहनावे और नई जबान को तरजीह देते थे। वो अंग्रेजी भाषा के साथ हिन्दी, मराठी और मालवा क्षेत्र की भाषाएं धाराप्रवाह बोलते थे और इन्हीं भाषाओं में प्रवचन भक्तों को सुनाते थे। महंत ने कहा कि उनकी मौत से देश को बड़ा अघात हुआ है। वह निडर, निर्भीक और सच के साथ खड़े रहने वाले संत थे। उनके अंदर संत के सारे गुरू थे। वह भगवान कृष्ण को मानते थे तो रामायण की पंक्तियां उनकी जुंबा पर रहती थीं। जब वह प्रवचन देते तो भक्त तो सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो जाया करते थे।
Published on:
12 Jun 2018 05:14 pm

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