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IIT में तैयार किट रोकेगी सेक्सुअल एब्यूज़

आईआईटी के पांच छात्रों ने मिलकर एक किट बनाई है, जिसके इस्तेमाल से बच्चे सेक्सुअल एब्यूज जैसी चीज़ों से बच सकते हैं|

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Abhishek Gupta

Apr 17, 2016

Child Sex Abuse

Child Sex Abuse

कानपुर.
अभी शहर में कुछ दिन पहले एक बच्चे के साथ तीन लड़कों ने कुकर्म
किया था| बच्चा कई दिनों से अंदर ही अंदर घुट रहा था और अपने घरवालों को
बताने से हिचक रहा था| बच्चे की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे डॉक्टर के पास
ले गए, जहां डॉक्टर के पूछने पर बच्चे ने पूरी हकीकत बयां कर दी| हमारे
देश में करीब 46 प्रतिशत बच्चे सेक्सुअल एब्यूज का शिकार होते हैं, जिनमें
से ज़्यादातर मामलो में किसी रिश्तेदार का ही हाथ होता है| अकसर बच्चे डर
से इस बात को हर किसी से छिपाते हैं| वहीं वो कुछ बताना चाहते हैं, लेकिन उनके
घर वाले इसे समझ नहीं पाते| ये एक ऐसी सच्चाई है, जिससे हम मुंह नहीं
फ़ेर सकते| इन्हीं समस्याओं से निजाद दिलाने के लिए शहर के आईआईटी के पांच
छात्रों ने मिलकर एक किट बनाई है| जिसके इस्तेमाल से बच्चे सेक्सुअल
एब्यूज जैसी चीज़ों से बच सकते हैं| इस किट में ऐसी जानकारियां और सुझाव
हैं जो टीचर्स बच्चों को सिखाएंगे और उन्हें बताएंगे कि ऐसे वक़्त में क्या
किया जाए| साथ ही इस किट में ऐसी भी जानकारियां है जिससे बच्चों को
पता चले कि आखिर सेक्सुअल एब्यूज होता क्या है और कैसे लोग अकसर इस ज़ुर्म
को करते हैं|


एक साल में तैयार की किट

आईआईटी के
छात्र पूर्वा अग्रवाल, मिताली भसीन, स्नेहा पराही, सचिन और स्वंमसिद्व ने
सेक्युअल एब्यूज किट को बनाया है | इस किट के बनाने में इन छात्रों को एक
साल लग गए, तब कहीं जाकर 8 से 12 साल के बच्चों के लिए तैयार ये किट बन सकी। इस दौरान उन्होंने डॉक्टर्स, पेरेंट्स, टीचर्स से बात की, साथ ही
पिछले कई सालों के सेक्सुअल एब्यूज वाले केसे पर गौर किया| बच्चों को
सेक्सुअल एब्यूज को रोकने के लिए किट बनाई है| इस किट को बनाते वक़्त इस
बात का ख़्याल रखा गया है कि बच्चों की बातें, बच्चों की ज़ुबानी ही बताई
जाए| साथ ही टीचर्स और पेरेंट्स को भी इसे समझाने में किसी भी तरह की
दिक्कत न आए| यह किट कई एनजीओ को दी गई हैं, जिसका
रिज़ल्ट शानदार आया।


पांच साल में 2000 हजार मामले आए


कानपुर जोन में पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में करीब 2 हजार केस
सेक्सुअल एब्यूज के सामने आए हैं| इस मामले पर एसएसपी शलभ माथुर
ने बताया कि आईआईटी छात्रों ने जो किट तैयार की है, इससे पुलिस के साथ
पीड़ित बच्चों के परिजनों को फायदा होगा| बच्चे अब निडर होकर अपने साथ हुई
ज्यादती के बारे में खुलकर परिजनों को बता सकेंगे| वहीं आईआईटी के
प्रोफेसर डॉक्टर अविनाश चतुर्वेदी ने बताया कि इस किट को बनाने के लिए हमने
पांच छात्रों का चयन किया था| किट में एक ऐसा सॉफ्टवेयर लगाया गया है जो
बच्चे के सामने आने के बाद बच्चा अपनी आपबीती अपने आप बयां कर देगा| किट
को तैयार करने में करीब दस लाख रुपए लगे हैं| आमलोगों को जल्द ही किट
बाजार में उपलब्ध रहेगी|