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Kanpur News 10 लाख रूपए देकर इस IPS ने बचा ली लालसिंह की जान

कानपुर देहात में बतौर एसपी के पद पर तैनात आईपीएस अनुराग वत्स ने किडनी की बीमारी से जूझ रहे सिपाही की आर्थिक मदद।

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Kanpur News 10 लाख रूपए देकर इस IPS ने बचा ली लालसिंह की जान

कानपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस का नाम uttar pradesh police सुनते ही कई लोग डर जाते हैं। पीड़ित होने के बावजूद शिकायत के लिए थाने नहीं जाते, पर ऐसे अफसर आज भी हैं जो अपनी इमानदारी के चलते आमजनता के दिलों में राज करते हैं। हम ऐसे ही एक आईपीएस अनुराग वत्स IPS anurag vats से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने आरक्षी चालक लालसिंह, police constable जिनकी किडनी डैमेज kidney damage की जानकारी हुई तो उन्होंने अपने वेतन के अलावा जिले के अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से financial help पीड़ित को 10,666,500 रूपए देकर उनकी जान बचा ली।

अलग पहचान बनाई
उत्तर प्रदेश पुलिस Uttar Pradesh Police का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें 2013 बैच के आईपीएस अनुराग वत्स 2013 batch IPS Anurag Vats की अलग पहचान है। अपराधियों पर सख्ती को लेकर चर्चित अनुराग वत्स ने बेगुनाहों को इंसाफ दिलाने के साथ ही गरीबों के लिए हर समय खड़े रहने वाले अफसर हैं। देहात कानपुर Sp kanpur dehat में बतौर एसपी के पद पर तैनात अनुराग वत्स को जब पता चला कि आरक्षी लालसिंह की किडनी खराब हो गई हैं। किडनी ट्रांसलेट कर खर्च 11 लाख के करीब आएगी, तो उन्होंने अपने पूरे साल की वेतन का चेक आरक्षी लालसिंह को सौंप दिया।

कौन हैं लाल सिंह
फतेहपुर निवासी लाल सिंह जिले में चल रही 100 डायल की गाड़ी में चालक है। स्वास्थ्य खराब होने पर डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने बताया उनकी किडनी में खराबी आ गई है। इलाज में डॉक्टर ने काफी खर्च आने की बात कही। इससे सिपाही परेशान था। परेशानी का कारण पूछने पर उसने साथियों को पूरी बात बताई। यह जानकारी एसपी तक पहुंची। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों से अपनी इच्छा के अनुसार सिपाही की मदद के लिए राशि देने को कहा। इसके बाद सभी ने अपने वेतन से इच्छानुसार राशि कटवा दी। एसपी ने जब सिपाही को चेक दी तो उसकी आंखों में आंसू आ गए।

कौन है अनुराग वत्स
2013 बैच के आईपीएस ऑफिसर अनुराग वत्स मूल रूप से गाजियाबाद के मुरादनगर के रहने वाले हैं। इन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा गाजियाबाद से ली और फिर आगे की पढ़ाई इन्होंने दिल्ली से की। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुलिस अधीक्षक नगर रहते हुए उन्होंने काम का लोहा मनवाया। फिलहाल अनुराग वत्स ने वर्तमान में कानपुर देहात में एसपी के पद पर तैनात हैं। अनुराग वत्स ने बताया कि उनके पिता का उनकी जिंदगी में काफी अहम रोल हैं और वहीं उनकी प्रेरणा भी है। उन्होंने बताया कि एक शिक्षक के घर जन्म लेने की वजह से उन्हे समाज के प्रति नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियां निभाने की सदैव प्रेरणा मिली.।

बांग्लादेश के डकैतों को पकड़ा
अनुराग वत्स ने गोमतीनगर इलाके में डकैती की पड़ताल के दौरान बांग्लादेश के नंबरों को चिह्नित किया। तीन महीने तक गिरोह के पीछे लगे रहे। पुलिस की गतिविधियों का पता लगा रहे डकैतों के बांग्लादेश से कूच करते ही उन्हें भनक लग गई। डकैतों के पहुंचने से पहले तीन सौ पुलिसकर्मियों से विभिन्न स्थानों के रेलवे ट्रैक पर घेराबंदी कराई। डकैती से पहले ही मुठभेड़ में पुलिस की गोली से घायल दो बांग्लादेशी डकैत दबोचे गए थे। अनुराग अपनी टीम के साथ रात तीन बजे तक क्षेत्र में सक्रिय रहते थे। इतना ही नहीं पीजीआई इलाके में रसूखदार द्वारा बेटी की हत्या के मामले में अनुराग वत्स ने दबाव व सिफारिशों की परवाह न करते हुए कार्रवाई की थी।

तब बोलने लगा फर्जी आईपीएस
पिछले दिनों अकबरपुर कोतवाली में निजी वाहन में बैठकर पहुंचे एक आईपीएस को देखकर कोतवाली में खलबली सी मच गई। आईपीएस को पहले तो पुलिस कर्मियों ने सैल्यूट कर थाने में बैठाया इसके बाद चाय नाश्ता भी मंगाया। आईपीएस की वर्दी पहने युवक इंस्पेक्टर और पुलिस कर्मियों को समझाने लगा. बातचीत के दौरान ही इंस्पेक्टर को कुछ शक हुआ तो उन्होंने कानपुर देहात के एसपी अनुराग वत्स को फोन पर जानकारी दी। मौके पर पहुंचे एसपी ने फर्जी आईपीएस के गाल में जोर का कंटाप जड़ा तो वह तोते की तरह बोलने लगा। पूछताछ में युवकयुवक फर्जी आईपीएस निकल।

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