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शौचालय के लड़ी लंबी जंग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली प्रेरणा!

प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर शौचालय के लिये इस वृद्धा ने आला अफसरों से लेकर न्यायालय तक लडी जंग  

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kanpur dehat

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कानपुर देहात. अक्सर लोगों के मुंह से सुना जाता है कि भगवान सबकुछ दे, लेकिन गरीबी न दे। गरीबी का आलम यूं है कि उसे एक अधिकार पाने के लिये वर्षों दर-दर की ठोंकरे खानी पड़ती है, फिर भी निराशा ही हासिल होती है, लेकिन गरीबों के लिये सरकार द्वारा ऐसी कई योजनायें चलाई जा रही है। जिससे लोग लाभांवित हो सके। लेकिन कहीं न कहीं इसे प्रशासनिक तंत्र में चूक होना कहा जायेगा है। जब कोई गरीब उस योजना के लाभ के लिये दर-दर भटकता है और न्यायालय के आदेश के बावजूद उसे उसका अधिकार न मिल सके।

सरवनखेड़ा ब्लाक के कीरतपुर गांव की करीब 60 वर्षीय वृद्धा रूपरानी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। जिसके भरसक प्रयास के बाद डेढ वर्ष तक शौचालय नहीं मिला। डेढ़ वर्ष गुजरने के बाद भी उसने हार नहीं मानी और वह अपने अधिकार के लिये लडती रही, अंत मे रूपरानी के घर शौंचालय बनवाया गया। दरअसल कुछ वर्ष पूर्व रूपरानी
के पति के देहांत के बाद बच्चो की परवरिश की जिम्मेदारी उसके सिर पर है।

करीब दो वर्ष पूर्व रूपरानी ने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गरीबों को शौचालय देने की योजना सुनी। तभी से उसने मन मे शौचालय बनवाने की ठान ली, लेकिन गरीबी के हालात में वह सक्षम नही थी तो उसने गांव के प्रधान से लेकर जिले के आला अफसरो से गुहार लगाई। लेकिन उसे कुछ हाथ नहीं लगा। तब जाकर उसने न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय ने उसके पक्ष मे फैसला सुनाते हुये जिले के सक्षम अधिकारियों को तीन महिने में उसके घर शौचालय बनवाने के लिये आदेश दिये। बावजूद इसके उसके घर शौचालय नहीं मिला, लेकिन रूपरानी ने आस नहीं छोड़ी। अंत में अफसरों से शौचालय पाकर रूपरानी ने जीत हासिल की।

प्रधान, डीएम से लेकर न्यायालय तक लगाई गुहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर विधवा रूपरानी ने सबसे पहले ग्राम प्रधान से शौचालय बनवाने को लेकर गुहार लगाई, लेकिन प्रधान ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद उसने जिलाधिकारीको पत्र लिखकर शौचालय की मांग की, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी, लेकिन रूपरानी पीछे नहीं हटी, उसने लोगों से सलाह लेते हुये हिम्मत जुटाकर न्यायालय में अर्जी लगाई।

सुनवाई में रूपरानी के पक्ष में फैसला सुनाते हुये न्यायालय ने जिले के अधिकारियों को 3 माह मे शौचालय बनवाने के आदेश दिये, लेकिन प्रशासन की नींद फिर भी नहीं
खुली। डेढ वर्ष के लम्बे प्रयास के बाद अंत में 5 अक्टूबर को जिले के अफसरों ने टीम भेजकर रूपरानी के घर शौचालय बनवाया।

डीसी विमल कुमार ने निजी धन से लगवाये टाइल्स

बेहर जर्जर हालात में परिवार का गुजारा कर रही रूपरानी का शौचालय तो बन गया, लेकिन पैसे के अभाव में टाइल्स लगवाना उसके लिये पहाड़ जैसा था। जिस पर मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ की पहल पर डीसी मनरेगा विमल कुमार ने अपने निजी धन से उसके शौचालय में टाइल्स लगवायी, जिसके बाद रूपरानीने खुशी का इजहार किया।

सामाजिक कार्यकर्ता कंचन मिश्रा ने किया सम्मानित

अपने अधिकार को पाने के लिये वृद्धा रूपरानी द्वारा लड़ी गयी। इस जंग की सराहना करते हुये अकबरपुर की समाजसेवी कंचन मिश्रा रूपरानी के घर कीरतपुर गांव पहुंची। जहां उन्होंने रूपरानी को धन्यबाद देते हुये शाल भेंटकर सम्मानित किया और गांव के अन्य लोगों के घर-घर जाकर उन्हे भी रूपरानी की तरह बनने के लिये प्रेरित किया है।