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कानपुर गैंगरेप केस में आरोपी दरोगा होने के चलते हल्की धाराएं, कोर्ट की फटकार के बाद ACP लाइन हाजिर, चौकी इंचार्ज निलंबित

Kanpur News: कानपुर गैंगरेप मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद बड़ा एक्शन लिया गया है। नाबालिग पीड़िता के केस में पॉक्सो एक्ट न लगाने पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई, जबकि आरोपी दरोगा को बचाने के आरोप लगे हैं। ACP लाइन हाजिर, चौकी इंचार्ज सस्पेंड और फरार दरोगा की तलाश तेज कर दी गई है।

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कानपुर गैंगरेप केस | Image Video Grab

Gangrape Case Kanpur: कानपुर गैंगरेप मामले में एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने ACP पनकी शिखर यादव को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं, सचेंडी थाने की भीमसेन चौकी के इंचार्ज दिनेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब कोर्ट और पीड़ित परिवार दोनों ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।

कोर्ट की नाराजगी, पॉक्सो न लगाने पर सख्त टिप्पणी

5 जनवरी की रात गैंगरेप की घटना के बाद 8 जनवरी को पीड़िता को कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन यहां भी पुलिस की लापरवाही खुलकर सामने आई। करीब तीन घंटे तक जांच अधिकारी कोर्ट नहीं पहुंचे और पीड़िता कोर्ट रूम के बाहर बैठी रही। जब विवेचक पेश हुआ तो जज ने साफ शब्दों में पूछा कि पीड़िता 14 साल की है, इसके बावजूद पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया। कोर्ट ने FIR में पॉक्सो की धाराएं जोड़ने के बाद ही बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए, जिसके चलते उस दिन बयान दर्ज नहीं हो सके।

पीड़िता को बयान से पहले ही ले गई पुलिस

कोर्ट की नाराजगी के बाद पुलिस पीड़िता को बिना बयान दर्ज कराए वापस ले गई। पीड़िता को नोएडा नंबर की लाल रंग की कार में बैठाकर कोर्ट परिसर से निकाला गया। इस दौरान पूरा घटनाक्रम पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता नजर आया।

भाई का आरोप- दरोगा को बचाने के लिए केस हल्का किया गया

पीड़िता के भाई ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि आरोपी खुद विभाग में दरोगा है, इसलिए जानबूझकर मुकदमे को हल्का रखा गया। उसने कहा कि पिछले तीन दिनों से उन्हें थाने और अधिकारियों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं, लेकिन न बयान दर्ज हो रहे हैं और न ही न्याय मिल रहा है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर की रैकी कराई जा रही है और लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

पीड़िता का दर्द- “मुझे घर जाना है”

गुरुवार को जब पीड़िता को कोर्ट से बाहर लाया गया, तो वह बार-बार यही कहती रही कि उसे घर जाना है। पुलिस ने मीडियाकर्मियों को उससे बात नहीं करने दी। पीड़िता मानसिक रूप से बेहद परेशान दिखाई दी और लगातार रोती रही।

पीड़िता का बयान- कार में किया गया गैंगरेप

पीड़िता के अनुसार, 5 जनवरी की रात करीब 10 बजे वह घर से निकली थी, तभी स्कॉर्पियो में बैठे दरोगा अमित कुमार मौर्य और यूट्यूबर शिवबरन यादव ने उसे जबरन गाड़ी में खींच लिया। दोनों उसे सचेंडी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास सुनसान जगह पर ले गए और गाड़ी के अंदर ही गैंगरेप किया। करीब दो घंटे बाद बेहोशी की हालत में उसे घर के बाहर फेंक दिया गया।

चौकी से भगाई गई पीड़िता

घटना के बाद पीड़िता अपने भाई के साथ चौकी पहुंची, लेकिन वहां उसे डांटकर भगा दिया गया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर से शिकायत करने पर अज्ञात में गैंगरेप और अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन पॉक्सो एक्ट शामिल नहीं किया गया।

तीन बड़ी लापरवाहियां आईं सामने

मामले में पुलिस की तीन बड़ी लापरवाहियां सामने आईं पहली, नाबालिग होने के बावजूद पॉक्सो एक्ट न लगाना; दूसरी, पीड़िता को चौकी से भगाना; और तीसरी, आरोपी दरोगा को फरार होने का मौका देना। इन्हीं कारणों से DCP वेस्ट को भी हटा दिया गया और सचेंडी इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया।

मेडिकल रिपोर्ट में रेप की आशंका

ADCP वेस्ट कपिल देव सिंह के अनुसार, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कल्याणपुर CHC में कराया गया, जिसमें रेप की आशंका जताई गई है। स्लाइड्स लैब भेजी गई हैं और स्कॉर्पियो वाहन की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के वक्त आरोपी दरोगा करीब 20 मिनट तक मौके पर मौजूद था।

आरोपी यूट्यूबर जेल भेजा गया

मामले में आरोपी यूट्यूबर शिवबरन यादव को जेल भेज दिया गया है। जेल जाते वक्त उसने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वह पीड़िता को पहचानता तक नहीं है। वहीं, मुख्य आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्य अब भी फरार है।

दरोगा की आखिरी लोकेशन बर्रा में

पुलिस के अनुसार, आरोपी दरोगा ने अपने दोनों मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिए हैं। उसकी आखिरी लोकेशन बर्रा इलाके में मिली है। आशंका जताई जा रही है कि वह गोरखपुर, मेरठ या अपने गृह जनपद महाराजगंज में छिपा हो सकता है। चार विशेष टीमों को उसकी तलाश में लगाया गया है।

धमकी और समझौते का दबाव

पीड़िता के भाई ने आरोप लगाया कि आरोपियों की ओर से 10 लाख रुपये लेकर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है। उसने यह भी कहा कि पीड़िता जहां रखी गई है, वहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं और वह बेहद डरी हुई है।

कांग्रेस का समर्थन, वकीलों ने उठाए सवाल

कांग्रेस पार्टी पीड़िता के समर्थन में सामने आई है। कांग्रेस ग्रामीण जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला कोर्ट में मौजूद रहे और पूरे मामले पर निगरानी रखी। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता सईद नकवी ने कहा कि विवेचक की घोर लापरवाही के कारण पीड़िता के बयान समय पर दर्ज नहीं हो सके, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।