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एक साल पहले हत्या, लाश की शिनाख्त भी नहीं, लेकिन इत्तेफाक से पकड़ गया कातिल

मियां-बीवी और बड़ी बहन के प्रेम त्रिकोण की कहानी बेहद दिलचस्प है। रोमांस, सेक्स, फरेब और कत्ल के मसाले वाली यह सच्ची कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है

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एक साल पहले हत्या, लाश की शिनाख्त भी नहीं, लेकिन इत्तेफाक से पकड़ गया कातिल

कानपुर. प्रेम त्रिकोण की तमाम कहानियां सुनी होंगी, यह किस्सा कुछ जुदा है। इस सच्ची दास्तां में एक आदमी का इश्क ही फरेब पर टिका है। वह अपनी जिस्म की हवस के लिए बीवी का इस्तेमाल करता है, जबकि पैसों की हवस के लिए बीवी की बड़ी बहन के साथ अवैध रिश्तों से परहेज नहीं किया। एक ही घर की छत के नीचे बीवी और बड़ी बहन को खुश रखता है। उसकी रात बीवी की बाहों में गुजरती थी, जबकि दिन के उजाले में बीवी के घर से बाहर निकलते ही दूसरी को अपनी बाहों में समेट लेता था। बीवी को सपने दिखाए थे, जबकि माशूका यानी बीवी की बड़ी बहन को सब्जबाग। बड़ी बहन से नजदीकी ज्यादा बढऩे लगी तो बीवी पर प्यार कम उमडऩे लगा। इसी दरम्यान इश्क में खटपट होने लगी, बीवी भी अपनी बड़ी बहन का पत्नी जैसा अधिकार देखकर दंग थी। कश्मकश के दौर में एक दिन फरेबी ने अपने बहनोई के साथ मिलकर खतरनाक प्लान बना डाला। क्या और कैसा प्लान ? यह जानने के लिए पढि़ए रोमांच और रोमांस की दास्तां.....


उपाध्याय का अपनी बीवी के साथ बड़ी बहन के साथ भी इश्किया

नौबस्ता इलाके के खांडेपुर मोहल्ले से वाफिक होंगे। अभी नया-नया मोहल्ला है। यहीं के उपाध्याय कुछ ज्यादा ही रंगीन मिजाज किस्म के इंसान हैं। प्राइवेट नौकरी करने वाले प्रमोद उपाध्याय ने अपनी बीवी रीना को तमाम सपने दिखाए थे। आलीशान मकान, बड़ी कार और तमाम जेवर और साडिय़ां। नौकरी से सपने पूरे होने मुश्किल थे, इसलिए चार सौ बीसी करने लगे। ठगी के उस्ताद बन गए, बड़ी-बड़ी बातें छोडऩे लगे। एक दिन बीवी की बड़ी बहन से डींग हांक बैठे कि सरकारी नौकरी लगवाने का जुगाड़ है। बड़ी बहन ने जीजा से नौकरी लगवाने को कहा तो बता दिया कि खर्चा लगता है। वह देने को तैयार हो गई और पचास हजार रुपए बतौर एडवांस थमा दिए। अब नौकरी के बहाने बीवी की बड़ी बहन से आए दिन मिलना-जुलना होने लगा। वह भी चकरपुर मंडी से जीजा के घर अक्सर ही आने लगी। मुलाकातों के दौर ने मोहब्बत को पैदा कर दिया। अब जीजा और साहिबा एक दूजे के आशिक बन चुके थे। उपाध्याय के घर में अक्सर ही कई-कई दिन के लिए साहिबा आकर रुकने लगीं। उपाध्याय की चांदी थी। वह रात को बीवी की बाहों में सिमटे रहते थे, जबकि सुबह बीवी के घर से बाहर निकलने पर साहिबा को हम बिस्तर बना लेते थे।


दो साल चला गुपचुप वाला खेल, अब बीवी को खटकने लगा

उपाध्याय की प्रेम लीला दो बरस जारी रही। साहिबा के आने पर रात को बीवी को कम वक्त मिलने लगा तो शक गहराने लगा। जासूसी हुई तो प्रेम कहानी के पन्ने-पन्ने उधड़ गए। बड़ी बहन को घर से निकाल दिया, साथ ही खबरदार किया कि शौहर की तरह आंख भी उठाई तो मौत मिलेगी। भला, इश्क भी कहीं ऐसी धमकियों से डरता है। अब उपाध्याय और साहिबा दूसरे ठिकाने पर मिलने लगे। गुजरते वक्त के साथ सरकारी नौकरी के वादे की याद दिलाई तो ठग जीजा ने नया शिगूफा गढ़ दिया कि अफसर का तबादला हो गया है। नए से सेटिंग नहीं बन रही है। साहिबा ने पैसे वापस मांगे तो टहलाने लगे। फोन उठाने से परहेज होने लगा, बीवी को बरगलाने लगे। ऐसे में एक दिन साहिबा तमाम चैटिंग और फोन रिकार्डिंग लेकर बहन के घर पहुंच गई। उपाध्याय की पोल खुल चुकी थी। साहिबा धमकी देकर गई थी, बीवी भी आग-बबूला थी। दोनों हाथ में लड्डू रखने वाले उपाध्याय का सिर अब कढ़ाही में था।


किस्सा खत्म करने के लिए जीजा ने जीजा के साथ प्लान रचा

रीना और सोनी के बीच अटक गए उपाध्याय ने किस्सा खत्म करने के लिए खतरनाक प्लान बनाया। पिछले साल 4 जून को प्रमोद ने अपने जीजा आनंद, जोकि चकेरी के जाजमऊ इलाके में मनोहर नगर में रहता है, को बुलाकर प्लान समझाया। उपाध्याय ने अपनी एक्स माशूका सोनी को पैसे वापस करने का झांसा देकर खाड़ेपुर बुलाया। उपाध्याय की बीवी मायके गई थी। सोनी के आने से पहले दोनों ने जाम लड़ाए। इसके बाद सोनी आई तो जबरदस्ती करने लगे। वह चिल्लाई तो दोनों ने गला घोंटकर उसे मार डाला। अब रात का इंतजार था। जैसे ही अंधेरा हुआ तो जीजा-साले ने सोनी की लाश को प्लास्टिक की बड़ी बोरी में भरा और घर से 30 किलोमीटर दूर महाराजपुर में तिवारी पुलिया के नीचे फेंक आए।


एक साल मौज में गुजारे, तीन डंडे में उगल दिया दफन हुआ राज

सोनी को दुनिया से रुखसत करने के बाद प्रमोद और आनंद मस्त थे, क्योंकि वारदात के अगले दिन महराजपुर के ग्राम प्रधान हरिश्चंद्र यादव ने अज्ञात के खिलाफ हत्या कर शव फेंकने का मुकदमा दर्ज कराया था। तमाम कोशिश के बावजूद लाश की शिनाख्त भी नहीं हुई तो पकड़े जाने का खौफ कैसा? एकबात और, सोनी की हत्या करने के बाद प्रमोद और आनंद ने उसके शरीर से नाक की कील और पायलों को निकालकर गुजैनी के सर्राफ संतोष कुमार के पास गिरवी रख दिया था। बीते दिवस चकेरी पुलिस ने जाजमऊ में वाहन चेकिंग के दौरान बाइक के कागजात नहीं होने पर प्रमोद और आनंद को रोक लिया। थाने में तलाशी के दौरान तमंचा और कारतूस बरामद हुआ तो पुलिस ने ठुकाई करते हुए पुराने जुर्म कबूलवाने शुरू कर दिए। तीन-चार लाठी में प्रमोद टूट गया और सोनी की हत्या का राज उगल दिया।