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प्रियंका गांधी संभालेंगी कानपुर से कांग्रेस के चुनाव अभियान की कमान !

रणनीतिकार भी एक्शन में आ गए हैं और बीजेपी को हराने के लिए अपने तरकस से तीर निकालनें लगे हैं।
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कानपुर

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Vinod Nigam

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Updated: 5 Aug 2018, 12:08 PM IST

Priyanka Gandhi may fight Lok Sabha Election from Kanpur

रायबरेली नहीं इस सीट से चुनाव लड़ सकती हैं प्रियंका गांधी, बड़े उलटफेर की तैयारी में कांग्रेस

कानपुर. लोकसभा का आगाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ससंद की पटल से कर दिया था। इसी के बाद देश के सभी राजनीतिक दल भी उनकी घेरबंदी करने के लिए जुट गए हैं। यूपी में सपा, बसपा के साथ गठबंधन पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लगभग-लगभग मुहर लगा दी हैं तो वहीं उनके रणनीतिकार भी एक्शन में आ गए हैं और बीजेपी को हराने के लिए अपने तरकस से तीर निकालनें लगे हैं। दो गुटों में बंटी कांग्रेस को कानपुर में एक करने के लिए पार्टी कदम बड़ा दिए हैं। कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने बताया कि ऐसी चर्चा है कि रायबरेली से चुनाव नहीं लडऩे की स्थिति में प्रियंका गांधी कानपुर में बैठकर यूपी की चुनावी कमान को संभालेंगी। कुछ कांग्रेसी बताते हैं कि लखनऊ और रायबरेली के साथ-साथ कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी और बरेली को कांग्रेसी चुनाव अभियान का केंद्र बनाया जाएगा।

कार्यकर्ताओं ने रखी मांग

कहते हैं कि लखनऊ और दिल्ली की सियासी कुर्सी का रास्ता कानपुर से ही निकल कर जाता है। 2004 में मजदूरों के शहर ने पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को यहां से जिताया तो दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बन गई। अगले चुनाव में फिर से पूर्व मंत्री जीते और दूसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर डॉक्टर मनमोहन सिंह बैठे। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐसी लहर चली कि कानपुर के अलावा यूपी में कांग्रेस दो तो सपा पांच व बसपा का खाता तक नहीं खुल सका। कानुपर नगर व देहात पर कमल खिला और बीजेपी को केंद्र की सत्ता मिली। पिछले चार साल से बीजेपी के हाथों हार झेल उठा रही कांग्रेस अब आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को फतह करने के लिए जुट गई है और इसी के कारण राहुल गांधी ने कानपुर के 16 पदाधिकारियों को दिल्ली बुलाया। कांग्रेस नेताओं के साथ राहुल गांधी ने शहर का मिजाज जाना तो कुछ ने प्रियंका वाड्रा गांधी को कानपुर से चुनाव लड़ाए जाने की मांग रख दी।

इसलिए महत्वपूर्ण है कानपुर

कांग्रेस के नेता सौरभ श्रीवास्तव बताते हैं कि आपातकाल के बाद पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा चरम पर था। आद्यौगिक राजधानी कानपुर में मजदूर गोलमंद थे और वो वामदलों के साथ खड़े थे। यहां के नेताओं ने अपनी खोई जमीन को पाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से चुनावी रैली का आगात कानपुर से करने को कहा। इंदिरा गांधी ने भी उनकी बात सुनकर फूलबाग की रैली में शामिल होने की रजामंदी दे दी। इंदिरा गांधी लखनऊ के रास्ते 19 सितंबर 1978 को शहर पहुंची। फूलबाग के मैदान पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। लोग इंदिरा को सुनने के लिए पेड़ों की टेहनियों में चढ़े थे। इंदिरा गांधी ने गंगा के किनारे से चुनाव जिताने की अपील की और 1980 के चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आ गई। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी ने भी कानपुर को चुनाव केंद्र के रूप में रखा और तिलकहॉल से यूपी से पंजे को ताकत मिलती थी।

पार्टी को मिल सकती है मजबूती

कानपुर नगर में करीब छह लाख ब्राम्हण्ण मतदाता हैं, जो पिछले चार चुनाव के दौरान बीजेपी के साथ खड़े रहे। इसी का परिणाम रहा कि सबसे बड़ा संगठन होने के बावजूद कांग्रेस को जीत नहीं नसीब हुई। वहीं पार्टी के अंदर टिकट को लेकर निकाय चुनाव से शुरू घमासान आज भी जारी है। बीते दिनों गुलाब नबी आजाद और राज बब्बर कानपुर आए और बैठक के दौरान दोनों गुटों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा मारपीट पर उतारू हो गए थे। दोनों नेताओं ने इसकी जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी। राहुल गांधी ने जितिन प्रसाद को कानपुर भेज दोनों गुटों के नेताओं को एक साथ लाने को कहा। जितिन प्रसाद सबसे पहले अजय कपूर से मिले, फिर पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश के साथ भोजन किया और आलोक मिश्रा के घर जाकर चाय पी। लेकिन अंदर खाने रार बरकरार रही। जिसके चलते स्थानीय पदाधिकारियों ने इन दो गुटों के अलावा तीसरे चेहरे को कानपुर से उतारे जाने की मांग राहुल गांधी से की।

कांग्रेसियों ने माना, इस बार होगा नया चेहरा

तिलकहॉल की सियासत को देखें तो यहां हरदिन कांग्रेस के पदाधिकारियों की बैठक होती है। बैठक में बड़े नेता तो नहीं आते पर स्थानीय कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहता है। पिछले कई दिनों से तिलकहॉल में हलचल बदली हुई नजर आ रही है। कई कांग्रेसी यह मान रहे हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में स्थानीय के बजाए बाहर के उम्मीदवार के लिए प्रचार करना होगा। वहीं जब यूपी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद राजाराम पाल से प्रियंका गांधी के कानपुर से चुनाव लड़के के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा यह पार्टी तय करेंगी। हां अगर प्रियंगा वाड्रा गांधी कानपुर से चुनाव लड़ती हैं तो इससे शहर को ही नहीं पार्टी को जबरदस्त फाएदा होगा और भाजपा को करारी हार उठानी पड़ेगी। हम तो मांग करते हैं कि वो चुनाव में आएं और झूठ बोलने वालों की सरकार को हटाएं।